K-4 मिसाइल और 7000 टन का वजन ; जानिए INS अरिधमान की वो खूबियां जो इसे बनाती हैं सबसे अलग
विशाखापत्तनम में भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिधमान को नौसेना में शामिल किया गया, जो उन्नत के-4 मिसाइलों और परमाणु मारक क्षमता से लैस है।

आईएनएस अरिधमान विशाखापत्तनम के तट पर
भारत की सामरिक ताकत को एक निर्णायक बढ़त देते हुए देश ने अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman को Visakhapatnam में औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को भी एक नई मजबूती प्रदान करती है।
लगभग 7,000 टन वजनी अरिहंत-श्रेणी की यह उन्नत पनडुब्बी लंबे समय तक चले समुद्री परीक्षणों के बाद सेवा में शामिल हुई है। वर्ष 2021 में चुपचाप लॉन्च की गई इस पनडुब्बी में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है। यह के-15 और के-4 जैसी परमाणु-सक्षम मिसाइलों से लैस है, जो समुद्र से रणनीतिक हमले की क्षमता को सशक्त बनाती हैं। इसी के साथ भारत के पास अब तीन सक्रिय एसएसबीएन (SSBN) पनडुब्बियां हो गई हैं, जो किसी भी संभावित परमाणु हमले के बाद जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।
शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’!
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 3, 2026
यह पनडुब्बी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व्हीकल (ATV) परियोजना के तहत विशाखापत्तनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में तैयार की गई है। इसमें एक कॉम्पैक्ट लाइट वॉटर रिएक्टर लगाया गया है, जो इसे लंबी अवधि तक संचालन की क्षमता देता है और इसकी ध्वनि हस्ताक्षर को बेहद कम करता है, जिससे दुश्मन के लिए इसका पता लगाना कठिन हो जाता है। इसकी अधिकतम गति सतह पर 12–15 नॉट्स और पानी के भीतर लगभग 24 नॉट्स तक है।
INS अरिधमान में आठ वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) ट्यूब हैं, जो इसे अपने पूर्ववर्ती पोतों की तुलना में अधिक मारक क्षमता प्रदान करते हैं। यह 24 के-15 मिसाइल या 8 के-4 मिसाइल, और भविष्य में के-5 मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम है, जिनकी मारक क्षमता हजारों किलोमीटर तक फैली है। इस तरह यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और अधिक प्रभावी बनाती है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में संकेत दिया था कि पनडुब्बी अपने अंतिम परीक्षण चरण में है और जल्द ही इसे सेवा में शामिल किया जाएगा। इसके बाद यह पनडुब्बी सफलतापूर्वक सभी परीक्षणों को पूरा कर अब नौसेना का हिस्सा बन चुकी है। इसी अवसर पर स्टेल्थ फ्रिगेट INS तारागिरी का भी शामिल होना भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता में बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
INS अरिधमान की कमीशनिंग भारत के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को मजबूत करती है और देश को उन चुनिंदा राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करती है, जिनके पास उन्नत परमाणु पनडुब्बी क्षमता है। यह केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच देश की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
