मस्कट के तट पर भारतीय नौसेना का पराक्रम: INS कौंडिन्य का भव्य स्वागत, समुद्री सुरक्षा में बढ़ेगा रणनीतिक सहयोग
मस्कट में भारतीय नौसेना के INS कौंडिन्य का भव्य स्वागत! ओमान के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूती देने और समुद्री सुरक्षा के साझा विजन को साझा करने पहुँचा भारतीय युद्धपोत। जानिए इस दौरे का महत्व, रक्षा अभ्यास की रूपरेखा और कैसे यह भारत की समुद्री शक्ति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला रहा है।

मस्कट (ओमान): अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं पर भारत के बढ़ते दबदबे और 'सागर' (SAGAR) विजन को मजबूती देते हुए भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक रसद पोत, INS कौंडिन्य, ओमान की राजधानी मस्कट पहुँचा। ओमान के सुल्तान की धरती पर इस विशालकाय युद्धपोत का स्वागत जिस गर्मजोशी और सम्मान के साथ किया गया, उसने भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। यह यात्रा केवल एक औपचारिक बंदरगाह कॉल (Port Call) नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
शानदार आगमन और कूटनीतिक गर्मजोशी
जैसे ही INS कौंडिन्य ने मस्कट के पोर्ट सुल्तान काबूस में प्रवेश किया, ओमान की रॉयल नेवी और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों ने जहाज का पारंपरिक स्वागत किया। बैंड की धुन और दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की मौजूदगी में यह दृश्य अत्यंत विहंगम रहा।
इस ऐतिहासिक यात्रा के मुख्य विवरण:
- रणनीतिक उद्देश्य: इस दौरे का मुख्य लक्ष्य द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करना और 'इंट्रोपेराबिलिटी' (Interoperability) को बढ़ावा देना है।
- साझा अभ्यास: बंदरगाह प्रवास के दौरान, भारतीय और ओमानी नौसेना के अधिकारी समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव अभियान (SAR) और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
- रसद शक्ति का प्रदर्शन: INS कौंडिन्य अपनी ईंधन भरने और रसद आपूर्ति की क्षमताओं के लिए जाना जाता है। इसका यहाँ होना भारत की लंबी दूरी के अभियानों (Long Range Operations) की क्षमता को दर्शाता है।
समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर का भविष्य
ओमान, भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है, जो 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के प्रवेश द्वार पर स्थित है। हाल के वर्षों में समुद्री डकैती और तस्करी जैसी चुनौतियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला है। ऐसे में INS कौंडिन्य की मस्कट यात्रा का संदेश स्पष्ट है—भारत अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जहाज पर आयोजित 'ओपन हाउस' सत्रों में ओमान के सैन्य नेतृत्व ने भारतीय नौसेना की स्वदेशी तकनीक और अनुशासन की सराहना की।
आधिकारिक और कानूनी पक्ष
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत दोनों देश नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का समर्थन करते हैं। इस यात्रा के दौरान होने वाले आदान-प्रदान से 'व्हाइट शिपिंग सूचना साझाकरण' (White Shipping Information Sharing) समझौते को और अधिक बल मिलेगा, जिससे वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस दौरे को "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" (SAGAR) के विजन को धरातल पर उतारने वाला कदम बताया है।
स्थायी मित्रता की ओर बढ़ते कदम
INS कौंडिन्य का मस्कट में हुआ यह भव्य स्वागत इस बात की पुष्टि करता है कि भारत और ओमान के रक्षा संबंध अब परिपक्वता के उस दौर में हैं जहाँ वे साझा चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकते हैं। जब यह जहाज मस्कट के तटों से विदा लेगा, तो यह अपने पीछे सहयोग की एक नई विरासत छोड़ जाएगा, जो आने वाले वर्षों में हिंद महासागर की लहरों को और अधिक सुरक्षित बनाएगी।

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