रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए, हैदराबाद स्थित रक्षा प्रौद्योगिकी फर्म 'ड्रोगो एयरोस्पेस' ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित JK-250e सर्विलांस ड्रोन की पहली खेप सफलतापूर्वक सौंप दी है। नासिक, महाराष्ट्र में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के अधिकारियों द्वारा प्राप्त की गई 41 ड्रोन्स की यह पहली खेप भारत के सैन्य हार्डवेयर में आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है। यह आपूर्ति कुल 217 सामरिक मानव रहित हवाई प्रणालियों के अनुबंध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका कुल मूल्य 72 करोड़ रुपये (7.2 मिलियन पाउंड) है। इस सफल शुरुआत के बाद, कंपनी अगस्त 2026 तक शेष 176 विमानों की आपूर्ति के लिए पूरी तरह तैयार है।

हैदराबाद स्थित कंपनी के अत्याधुनिक केंद्रों में निर्मित JK-250e ड्रोन को विशेष रूप से सैन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह ड्रोन फ्रंटलाइन इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही अभियानों (ISR) के लिए बेहद सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी उच्च क्षमता वाली बैटरी प्रणाली है, जो इसे एक बार चार्ज करने पर तीन घंटे तक हवा में रहने में सक्षम बनाती है, जिससे सीमा निगरानी में सेना को निर्णायक बढ़त मिलती है। इस परियोजना के माध्यम से विदेशी उप-प्रणालियों को घरेलू तकनीक से प्रतिस्थापित करना सीधे तौर पर केंद्र सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को गति दे रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हाल ही में आयोजित प्रदर्शनियों में इस स्वदेशी क्षमता की सराहना की है।

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Pratahkal Newsroom

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