नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और रणनीतिक अस्थिरता के बीच भारत और ओमान ने अपनी ऐतिहासिक रक्षा साझीदारी को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। दोनों मित्र देशों ने ओमान के सुल्तान के सशस्त्र बलों (एसएएफ) के सैन्य कर्मियों के लिए दो विशेषज्ञ भारतीय मोबाइल प्रशिक्षण टीमों (आईएमटीटी) द्वारा आयोजित एक विशेष सैन्य प्रशिक्षण पहल के माध्यम से अपने रणनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय परिचालन समन्वय, संयुक्त रसद तैयारियों और उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने की क्षमता को विकसित करना था। इस सैन्य सहयोग को इस क्षेत्र की स्थिरता के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सशस्त्र बल के एक शीर्ष अधिकारी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के इस नाजुक दौर में आयोजित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नेतृत्व एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय (मुख्यालय आईडीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। इस विशेष अभियान में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के चुनिंदा और अनुभवी सैन्य कर्मियों को शामिल किया गया था, जिन्होंने ओमान की धरती पर तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान साझा किया। एकीकृत रक्षा स्टाफ के मुख्यालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण की सफलता की पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते सैन्य और राजनयिक संबंधों का एक प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है।

इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सत्र की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए मुख्यालय आईडीएस ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि इस अभियान के तहत दो भारतीय मोबाइल प्रशिक्षण दलों (आईएमटीटी) ने ओमान के सुल्तान की सशस्त्र सेना (एसएएफ) के जवानों और अधिकारियों के लिए सफलतापूर्वक पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। इस संयुक्त अभ्यास और रसद प्रशिक्षण कार्यक्रम में ओमान की शाही सेना, शाही नौसेना, शाही वायु सेना और वहां के रक्षा मंत्रालय की विभिन्न महत्वपूर्ण सुरक्षा एजेंसियों के लगभग 110 वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी अंतर-संचालनीयता यानी इंटर-ऑपरेबिलिटी को बढ़ाने पर सबसे अधिक जोर दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय राजनयिक हलकों में इस सैन्य सहयोग को भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति के एक बड़े और सफल प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से यह रणनीतिक घटनाक्रम भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी से हुई अत्यंत महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता के ठीक बाद सामने आया है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने अपनी उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के दौरान संपूर्ण पश्चिम एशिया संकट से संबंधित हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर गंभीर विमर्श करने के साथ-साथ रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर आपसी सहयोग को और अधिक विस्तार देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। मंत्रियों की इसी सहमति को धरातल पर उतारते हुए दोनों सेनाओं ने इस विशेष प्रशिक्षण को गति दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान, अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित होने के कारण भारत के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री और सैन्य साझीदार है। भारतीय मोबाइल प्रशिक्षण टीमों द्वारा ओमान की तीनों सेनाओं के संयुक्त रसद नेटवर्क को सुदृढ़ बनाना इस बात का संकेत है कि दोनों देश भविष्य की किसी भी सुरक्षा आपात स्थिति के लिए साझा तंत्र विकसित कर रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री व्यापारिक मार्ग सुनिश्चित करने और खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए भारत और ओमान का यह रक्षा सहयोग न केवल द्विपक्षीय हितों की पूर्ति करता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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