Joint Military Exercise : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की कठोर पहाड़ियों में भारत और नेपाल की सेनाएँ एक बार फिर कंधे से कंधा मिलाकर युद्धक कौशल को धार दे रही हैं। ‘एक्सरसाइज सूर्य किरण’ का 19वां संस्करण इस बार न सिर्फ पैमाने में बड़ा है, बल्कि अपने उद्देश्यों और तकनीकी क्षमताओं में भी पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई दे रहा है। जंगल युद्ध से लेकर अत्याधुनिक ड्रोन निगरानी तक, यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के लिए आधुनिक युद्धक चुनौतियों के अनुकूल होने का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।

भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह वार्षिक अभ्यास भारत और नेपाल के बीच विश्वास, दोस्ती और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने वाली सबसे महत्वपूर्ण सैन्य पहलों में से एक है। दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी सैन्य साझेदारी इस संयुक्त प्रशिक्षण में नई मजबूती और गहराई प्राप्त कर रही है।

इस संस्करण में भारत और नेपाल, दोनों की ओर से 334–334 सैनिक शामिल हैं। भारत की ओर से मुख्य नेतृत्व असम रेजिमेंट के जवानों के पास है, जबकि नेपाल की तरफ से देवी दत्त रेजिमेंट के सैनिक अग्रिम भूमिका निभा रहे हैं। मुख्य फोकस पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों, जंगल युद्ध, मानवीय सहायता और आपदा राहत, चिकित्सा प्रतिक्रिया, पर्यावरण संरक्षण और ग्राउंड–एयर ऑपरेशनों पर है।

अभ्यास को इस वर्ष विशेष रूप से नई और उभरती सैन्य तकनीकों के साथ जोड़ा गया है। मानवरहित हवाई प्रणाली, ड्रोन आधारित निगरानी, AI-आधारित निर्णय सहायता उपकरण, मानवरहित लॉजिस्टिक वाहन और उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म इस संयुक्त पहल को आधुनिक युद्ध रणनीतियों के अनुरूप बना रहे हैं। इन तकनीकों के जरिए दोनों सेनाएँ संयुक्त राष्ट्र के अध्याय 7 के तहत उप-पारंपरिक अभियानों को बेहतर ढंग से समझने और क्रियान्वित करने के लिए तैयार हो रही हैं।

सैनिकों द्वारा की जा रही कठोर ड्रिल, संयुक्त रणनीतियाँ, अनुभव साझा करना और सामरिक समन्वय का यह पूरा क्रम भविष्य में संयुक्त ऑपरेशनों के दौरान इंटरऑपरेबिलिटी को उच्चतम स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस प्रशिक्षण का लक्ष्य किसी भी शांति-स्थापना या आपातकालीन अभियान में जीवन और संपत्ति के जोखिम को कम करते हुए बेहतर तालमेल के साथ संचालन करना है।

‘सूर्य किरण’ का यह 19वां संस्करण सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत और नेपाल की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और रणनीतिक निकटता का जीवंत प्रमाण बनकर उभर रहा है। पहाड़ियों में चल रही यह संयुक्त पहल दोनों देशों की सैन्य साझेदारी में एक नया, अधिक मजबूत और अधिक तकनीक-सक्षम अध्याय जोड़ रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story