आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी कैंपस में साढ़े चार करोड़ की लागत वाली हाईटेक सर्कुलेटिंग वॉटर टनल सुविधा का संचालन रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए शुरू किया गया।

IIT Madras Mazagon Dock naval partnership : वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर भारत अब अपनी समुद्री सीमाओं को सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए तकनीक के मोर्चे पर एक नए और युगांतरकारी युग में प्रवेश कर चुका है। हिंद महासागर से लेकर प्रशांत क्षेत्र तक बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और चुनौतियों के बीच, भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए देश के अग्रणी तकनीकी संस्थान आईआईटी मद्रास ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। भारत की प्रीमियर युद्धपोत निर्माण कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ मिलकर आईआईटी मद्रास ने एक ऐसी अत्याधुनिक और संवेदनशील रिसर्च सुविधा को धरातल पर उतारा है, जो भविष्य के भारतीय युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक प्रणालियों को अत्यधिक शक्तिशाली, सुरक्षित और विदेशी खतरों से मुक्त बनाएगी। यह स्वदेशी मरीन रिसर्च परियोजना समंदर की लहरों पर भारत के प्रभुत्व को एक नया आयाम देने जा रही है।

इस ऐतिहासिक और रणनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में साढ़े चार करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार की गई हाईटेक 'सर्कुलेटिंग वॉटर टनल फैसिलिटी' (CWTF) है। इस विश्वस्तरीय प्रयोगशाला को आईआईटी मद्रास के नवनिर्मित 'डिस्कवरी' सैटेलाइट कैंपस में स्थापित किया गया है, जो अब पूरी तरह से क्रियान्वित और ऑपरेशनल मोड में आ चुकी है। यह कोई साधारण परीक्षण शाला नहीं है, बल्कि समुद्री इंजीनियरिंग का एक ऐसा अत्याधुनिक महाकेंद्र है जहां कृत्रिम और पूरी तरह से नियंत्रित जल व वायु प्रवाह के जरिए विशाल जहाजों, प्रोपेलर्स, मानवरहित समुद्री वाहनों और पानी के भीतर काम करने वाली जटिल गुप्त संरचनाओं के व्यवहार का बेहद बारीक अध्ययन किया जाएगा। यहाँ वैज्ञानिक बेहद तेज समुद्री धाराओं, दबाव और चक्रवातों जैसी अत्यंत विकट परिस्थितियों को पैदा करके यह पहले ही जान सकेंगे कि भारतीय रक्षा उपकरण युद्ध के मैदान में कैसा प्रदर्शन करेंगे।

आधिकारिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस संयुक्त उद्यम को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, जो अब तक देश को 33 उन्नत युद्धपोत और 8 घातक पनडुब्बियों सहित 808 से अधिक समुद्री पोत सौंपकर नौसेना की रीढ़ बनी हुई है, इस तकनीकी साझेदारी से अपनी विनिर्माण क्षमता को और निखारेगी। आईआईटी मद्रास के डीन प्रो. अश्विन महालिंगम के अनुसार, ओशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में यह अनूठी अकादमिक और औद्योगिक साझेदारी रक्षा अनुसंधान को एक नई दिशा देगी। इसके माध्यम से भारत को अब अपने युद्धपोतों के हाइड्रोडायनामिक परीक्षणों के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं और महंगे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे देश के करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और रक्षा क्षेत्र की गोपनीयता भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

इस अभूतपूर्व रक्षा सहयोग के दूरगामी प्रभाव और भविष्य की योजनाएं और भी ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं। मझगांव डॉक के सीएमडी कैप्टन जगमोहन के आधिकारिक वक्तव्यों के अनुसार, यह हाईटेक टनल केवल शुरुआत है। दोनों संस्थान भविष्य में 'हाइड्रा सेंटर' नामक एक महा-परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत एक अभूतपूर्व 500 मीटर लंबा विशाल 'टोइंग टैंक' निर्मित किया जाएगा, जो एशिया के सबसे बड़े शिप-टेस्टिंग टैंकों में से एक होगा। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना की खुफिया पनडुब्बियों की परिचालन क्षमता को गुप्त और घातक बनाए रखने के लिए दोनों संस्थान संयुक्त रूप से एक स्वदेशी, हाई-एफिशिएंसी मल्टीस्टेज थर्मोइलेक्ट्रिक सब-जीरो रेफ्रिजरेशन सिस्टम विकसित करने की कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। यह अत्याधुनिक सब-जीरो कूलिंग तकनीक पानी के नीचे नौसैनिकों और मशीनरी की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

इस महापरियोजना का सीधा प्रभाव केवल सैन्य रक्षा तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका व्यापक असर भारत के संपूर्ण समुद्री उद्योग, वाणिज्यिक जहाज निर्माण, ऑफशोर पवन ऊर्जा और गहरे समुद्र में खनन परियोजनाओं (डीप ओशन माइनिंग) पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का दृढ़ विश्वास है कि आईआईटी मद्रास की यह खोज भारतीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार का एक ऐसा सैलाब लाएगी, जो भारत को वैश्विक जहाज निर्माण बाजार में एक शीर्ष खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। इस प्रकार, समंदर की गहराइयों में तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने का यह प्रयास आने वाले दशकों में भारत को समुद्री विज्ञान और नौसैनिक शक्ति के मामले में एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में सबसे मजबूत और निर्णायक कदम साबित होने जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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