Sukhoi 30 MKI landing Navi Mumbai Airport : भारतीय आसमान में सामरिक शक्ति और तकनीकी श्रेष्ठता का एक ऐसा नया अध्याय जुड़ गया है, जिसने देश की रक्षा तैयारियों को एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को देश के विमानन इतिहास में एक नया स्वर्णिम कीर्तिमान स्थापित किया, जब उसका अत्याधुनिक और सबसे भरोसेमंद अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान 'सुखोई-30 एमकेआई' पहली बार नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर सफलतापूर्वक उतरा। जैसे ही इस शक्तिशाली और विशालकाय लड़ाकू विमान ने नवी मुंबई के नवनिर्मित रनवे को छुआ, उसकी आकाशभेदी और गगनचुंबी गर्जना से पूरा माहौल गूंज उठा। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षण के साक्षी बने वहां मौजूद वायुसेना के आला अधिकारियों, इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ ने करतल ध्वनि और अपार उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक टचडाउन का भव्य स्वागत किया।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक लड़ाकू विमान की सामान्य सफल लैंडिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय वायुसेना की अचूक परिचालन क्षमता, आपातकालीन परिस्थितियों में तीव्र तैनाती की योग्यता और भारत के तेजी से विकसित हो रहे नागरिक-सैन्य एयरोस्पेस बुनियादी ढांचे के बेजोड़ सामंजस्य का एक जीवंत प्रदर्शन है। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाने वाला एक प्रमुख बहुउद्देशीय (मल्टीरोल) लड़ाकू विमान है, जो न केवल हवा में अपनी सर्वोच्च श्रेष्ठता स्थापित करने बल्कि अत्यधिक सटीकता के साथ लंबी दूरी तक जमीनी हमले करने में भी दुनिया भर में बेजोड़ माना जाता है। विमानन और रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नवनिर्मित नागरिक हवाई अड्डे पर इस स्तर के भारी लड़ाकू विमान की सफल लैंडिंग यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करती है कि युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी किसी भी विषम परिस्थिति में इस हवाई पट्टी का उपयोग सैन्य अभियानों, त्वरित रणनीतिक तैनाती और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत गुप्त व संवेदनशील कार्यों के लिए पूरी सटीकता के साथ किया जा सकता है।

इस हवाई अड्डे के इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह सुखोई की लैंडिंग क्षमता विस्तार की दिशा में एक और लंबी छलांग है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसी हवाई अड्डे के रनवे पर भारतीय वायुसेना के सी-295 (C-295) परिवहन विमान ने अपनी पहली ऐतिहासिक लैंडिंग की थी, और उस गौरवशाली अवसर पर सुखोई-30 ने नागरिक विमानन के स्वागत में आसमान में केवल फ्लाईपास्ट किया था। लेकिन अब, पहली बार खुद सुखोई-30 एमकेआई का सीधे रनवे पर पहिए उतारना यह दिखाता है कि भारत की नागरिक और सैन्य विमानन संरचना के बीच का आंतरिक समन्वय अब पूरी तरह परिपक्व हो चुका है। वायुसेना ने इस कारनामे के जरिए एक बार फिर यह साफ संदेश दिया है कि वह देश के किसी भी कोने और किसी भी श्रेणी के हवाई अड्डे से अपनी रणनीतिक गतिविधियों का संचालन करने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह मुस्तैद है।

सुखोई-30 एमकेआई की इस ताकत का लोहा पूरी दुनिया हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर में देख चुकी है, जहां भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित भारतीय वायुसेना के विशाल युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति-26’ के दौरान इस विमान की मारक क्षमता ने सभी को हैरत में डाल दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस युद्धाभ्यास में 'ऑपरेशन सिंदूर' की शानदार सफलता का विशेष उल्लेख किया गया था, जिसने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय वायुसेना लंबी दूरी तक दुश्मन के घर में घुसकर सटीक वार करने की संप्रभु क्षमता रखती है। 120 से अधिक आधुनिक विमानों की भागीदारी वाले उस व्यापक युद्धाभ्यास के पहले ही दिन आतंकवादी शिविरों, दुश्मन की हवाई पट्टियों, रडार स्टेशनों, बंकरों और पेट्रोलियम भंडारों सहित 18 महत्वपूर्ण सैन्य लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ नेस्तनाबूद किया गया था, जिसमें सुखोई-30 एमकेआई के साथ-साथ तेजस, राफेल, मिग-29, मिराज-2000 और जगुआर जैसे घातक लड़ाकू विमानों तथा भारत के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी अजेय मारक क्षमता का प्रदर्शन कर भारत के आत्मविश्वास से भरे आधुनिक सैन्य तंत्र को दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित किया था।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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