नई दिल्ली | 27 जनवरी, 2026 राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर जब 77वें गणतंत्र दिवस की परेड अपनी भव्यता बिखेर रही थी, तब पूरी दुनिया की निगाहें एक ऐसी नई सैन्य टुकड़ी पर ठिठक गईं जिसने शौर्य और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया। सिख लाइट इन्फैंट्री की नवगठित एलीट लाइट कमांडो यूनिट, 'भैरव बटालियन' ने पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में कदम रखकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। भगवान शिव के प्रचंड स्वरूप 'कालभैरव' से प्रेरणा लेने वाली इस टुकड़ी की पदचाप ने न केवल दिल्ली के आसमान को गुंजायमान किया, बल्कि भारत की सैन्य आधुनिकता का नया चेहरा भी पेश किया।

भैरव बटालियन: प्रचंड शक्ति और उच्च गतिशीलता का प्रतीक

अक्टूबर 2025 में स्थापित की गई इस विशिष्ट इकाई का मुख्य उद्देश्य 'हाई-मोबिलिटी ऑपरेशंस' यानी अत्यंत तीव्र गति से सैन्य अभियानों को अंजाम देना है। मेजर अंजुम गोरखा के नेतृत्व में इस टुकड़ी ने जब 'निश्चय कर अपनी जीत करूँ' के जयघोष और मस्तक पर निर्भयता का भाव लिए मार्च किया, तो दर्शक दीर्घा में मौजूद जनसमूह ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।

बटालियन की मुख्य विशेषताएं और प्रदर्शन:

  • कमांडो प्रशिक्षण: यह यूनिट सिख लाइट इन्फैंट्री की सबसे चुनिंदा कमांडो फोर्स है, जो दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित है।
  • आध्यात्मिक प्रेरणा: बटालियन का नाम और प्रतीक चिन्ह भगवान शिव के संहारक रूप 'भैरव' से प्रेरित है, जो युद्ध क्षेत्र में शत्रु के लिए काल का पर्याय बनने का प्रतीक है।
  • वैश्विक आकर्षण: परेड के दौरान उनकी विशेष युद्धक वर्दी और अनुशासित तालमेल के वीडियो सोशल मीडिया पर करोड़ों बार देखे गए।

प्रशंसा और विवादों के बीच वैश्विक चर्चा

भैरव बटालियन के पदार्पण ने दुनिया भर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं बटोरी हैं। प्रख्यात उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने टुकड़ी के 'योद्धा स्वभाव' (Warrior Spirit) की सराहना करते हुए इसे भारतीय सेना का गौरव बताया। हालांकि, जहाँ एक ओर करोड़ों भारतीयों ने इस शक्ति प्रदर्शन पर गर्व महसूस किया, वहीं कुछ विदेशी मंचों पर इस विशिष्ट शैली और वेशभूषा को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियाँ भी की गईं। भारतीय सैन्य विशेषज्ञों ने ऐसी टिप्पणियों को सांस्कृतिक समझ की कमी करार देते हुए इसे भारतीय सेना की परंपराओं का अभिन्न हिस्सा बताया है।

बदलती भारतीय सेना की नई धमक

भैरव बटालियन का पहली बार राष्ट्रीय पटल पर आना केवल एक सैन्य प्रदर्शन मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और आधुनिक होते भारत का संदेश है। यह बटालियन उस अजेय संकल्प का प्रतिनिधित्व करती है जहाँ प्राचीन युद्ध परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जा रहा है। गणतंत्र दिवस 2026 की यह झांकी आने वाले समय में भारतीय थल सेना की आक्रामक और चौकस रणनीति की एक महत्वपूर्ण पहचान बनेगी।

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