जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के नए प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला है, जो देश की 13 लाख सैनिकों वाली सेना की कमान ऐसे महत्वपूर्ण समय में संभाल रहे हैं जब सीमा पर चुनौतियां और आधुनिक युद्ध की आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने 'जय से विजय' को अपना आदर्श वाक्य बताते हुए देश सेवा और सेना के आधुनिकीकरण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने उन वीर सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया है।

समारोह के दौरान एक भावनात्मक क्षण तब आया जब नए सेना प्रमुख ने गार्ड ऑफ ऑनर के बाद अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। भारतीय सैन्य परंपराओं और व्यक्तिगत संस्कारों का यह अनूठा संगम उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रविनीश सेठ ने भी उन्हें सैल्यूट कर इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर अपना सम्मान प्रकट किया। जनरल धीरज सेठ ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना के 31वें सेनाध्यक्ष का पद संभालना उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी का विषय है।

जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग चार दशकों का रहा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र रहे जनरल सेठ को दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में शामिल किया गया था। अपने लंबे करियर में उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी बल का नेतृत्व किया है। पदोन्नति के बाद उन्होंने साउथ वेस्टर्न और सदर्न कमांड जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए सेना की रणनीतिक योजनाओं और आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने पेरिस में प्रतिष्ठित 'कमांड एंड स्टाफ कोर्स' भी किया है, जो उनकी वैश्विक सैन्य समझ को पुष्ट करता है।

सेनाध्यक्ष के रूप में जनरल सेठ ऐसे समय में कमान संभाल रहे हैं जब तकनीकी प्रगति और भू-रणनीतिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है। उनके अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण का लाभ भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध-क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तनकारी पहलों को मिलेगा। 'सुदर्शन चक्र कोर' का नेतृत्व करने से लेकर सेना मुख्यालय में अहम विभागों तक, उनकी भूमिका ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और संरचना को नई दिशा दी है। देश को उनसे उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में सेना और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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