मलारी, चमोली (उत्तराखंड):

उत्तराखंड के चमोली जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। भारत-चीन सीमा के बेहद करीब बसे सीमांत गांव मलारी के ऊपरी जंगलों में भीषण आग लग गई है। सूखे पत्तों और तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे बेशकीमती वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

राहत की बात यह है कि आग लगने वाली जगह से कुछ ही दूरी पर स्थित भारतीय सेना का कैंप पूरी तरह सुरक्षित है। प्रशासन और वन विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर आग बुझाने के प्रयास में जुटी हुई हैं।

क्या है पूरा मामला?

चमोली जिले के नीति घाटी में स्थित मलारी गांव सामरिक और पर्यटन, दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर मलारी के पास स्थित घने जंगलों से धुएं का गुबार उठता देखा गया। देखते ही देखते आग के शोले ऊंची पहाड़ियों तक फैल गए। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग और जिला प्रशासन को दी।

पहाड़ी इलाका होने और खड़ी ढलान होने के कारण आग बुझाने में शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वन विभाग के कर्मचारी स्थानीय लोगों की मदद से पारंपरिक तरीकों और उपकरणों का उपयोग कर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।

सेना का कैंप और सामरिक सुरक्षा

मलारी गांव भारत-चीन सीमा का अंतिम पड़ाव माना जाता है। यहाँ भारतीय सेना और आईटीबीपी (ITBP) की भारी मौजूदगी रहती है। आग लगने वाली जगह सेना के कैंप के करीब होने के कारण शुरुआत में काफी बेचैनी देखी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग अभी रिहायशी इलाकों और सेना के मुख्य ठिकानों से दूर है। एहतियात के तौर पर कैंप के आसपास 'फायर लाइन' को और पुख्ता कर दिया गया है ताकि आग सेना की संपत्तियों तक न पहुंच सके।

वनाग्नि के कारण और चुनौतियाँ

उत्तराखंड में इस साल सर्दियों में कम बर्फबारी और कम बारिश के कारण जंगलों में नमी की भारी कमी देखी जा रही है।

  • सूखी घास और चीड़ के पत्ते: जंगलों में बिछी सूखी घास और चीड़ के पत्तों (पिरुल) ने ईंधन का काम किया, जिससे आग तेजी से फैली।
  • भौगोलिक स्थिति: मलारी का इलाका अत्यधिक ऊंचाई पर है। यहाँ ऑक्सीजन कम होने और दुर्गम रास्तों के कारण दमकल की गाड़ियों का पहुंचना असंभव है।


प्रशासन की कार्रवाई

चमोली के जिलाधिकारी और वन प्रभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। वन विभाग की एक विशेष टीम को मौके पर तैनात किया गया है जो आग की दिशा बदलने और उसे फैलने से रोकने का प्रयास कर रही है। राजस्व विभाग की टीम भी नुकसान का आकलन करने के लिए गांव में मौजूद है।

ग्रामीणों में चिंता

मलारी गांव के स्थानीय निवासी अपनी पालतू गायों और भेड़ों के चारे को लेकर चिंतित हैं। इस मौसम में ग्रामीण अपने पशुओं को चराने के लिए इन जंगलों पर निर्भर रहते हैं। आग के कारण चारागाह नष्ट हो रहे हैं, जो पहाड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर चमोली का यह क्षेत्र इस समय धुएं की चादर में लिपटा हुआ है। हालांकि सेना का सुरक्षित रहना एक बड़ी राहत है, लेकिन वन्यजीवों और पर्यावरण को जो क्षति पहुँच रही है, उसकी भरपाई मुश्किल है। प्रशासन की प्राथमिकता अब आग को गांव की सीमा में प्रवेश करने से रोकना है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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