सरहदों का नया रक्षक 'विक्रम VT-21': एआई दिमाग और अभेद्य कवच से लैस, सेना के जांबाजों को मिला जीत का नया साथी!
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक हथियार प्रणाली से लैस यह स्वदेशी वाहन भारतीय सेना के पुराने पड़ रहे बीएमपी-2 बेड़े की जगह लेगा।

पुणे में डीआरडीओ के अनुसंधान केंद्र पर प्रदर्शित किया गया नया विक्रम VT-21 कॉम्बैट व्हीकल|
डीआरडीओ ने पेश किया नया विक्रम VT-21 कॉम्बैट व्हीकल, 2029 तक होगा शामिल
भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अपनी नई उपलब्धि 'विक्रम VT-21' इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) का अनावरण किया है। यह अत्याधुनिक युद्धक वाहन भारतीय सेना की थल शक्ति को नई परिभाषा देने के लिए तैयार है। रक्षा गलियारों में इस अनावरण को एक युगांतकारी घटना के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह वाहन न केवल वर्तमान युद्धक आवश्यकताओं को पूरा करता है बल्कि भविष्य की डिजिटल युद्ध कला के अनुकूल भी है। सेना में इसके शामिल होने की आधिकारिक समयसीमा 2029 तय की गई है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।
विक्रम VT-21 की तकनीकी विशिष्टताएँ इसे वैश्विक स्तर के समकालीन युद्धक वाहनों की श्रेणी में सबसे आगे खड़ा करती हैं। इस वाहन में 30 से भी अधिक ऐसे एडवांस फीचर्स शामिल किए गए हैं जो इसे पुराने पड़ रहे BMP-2 बेड़े का एक प्रभावी उत्तराधिकारी बनाते हैं। इसकी सबसे बड़ी शक्ति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित टारगेट ट्रैकिंग प्रणाली है, जो दुश्मन के ठिकानों की पहचान करने और उन पर अचूक निशाना लगाने में चालक दल की सहायता करती है। इसके अलावा, इसमें एक एकीकृत हथियार प्रणाली और उन्नत सुरक्षा कवच लगाया गया है, जो बारूदी सुरंगों और आधुनिक टैंक रोधी मिसाइलों से सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
रणनीतिक दृष्टि से यह कॉम्बैट व्हीकल भारतीय पैदल सेना की ऑपरेशनल क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। दुर्गम पहाड़ी इलाकों से लेकर रेगिस्तानी मैदानों तक, विक्रम VT-21 की गतिशीलता और मारक क्षमता बेजोड़ है। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इसे 'नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर' के सिद्धांतों पर विकसित किया है, जिससे यह युद्ध के मैदान में अन्य इकाइयों के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करने में सक्षम है। वाहन के भीतर लगी आधुनिक सेंसर प्रणाली रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी स्पष्ट विजिबिलिटी प्रदान करती है, जो काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स और सीमा पर होने वाली झड़पों में भारतीय जवानों को एक तकनीकी बढ़त दिलाएगी।
इस परियोजना का कानूनी और प्रशासनिक महत्व भी काफी अधिक है क्योंकि यह 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। डीआरडीओ ने इसके निर्माण के दौरान भारतीय उद्योग जगत की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन और रखरखाव में आसानी होगी। 2029 तक इसके सेना में पूर्ण समावेश की योजना न केवल एक लक्ष्य है, बल्कि यह देश की रक्षा तैयारियों के प्रति रक्षा मंत्रालय की गंभीरता को भी दर्शाता है। विक्रम VT-21 का आगमन पुराने पड़ चुके रूसी मूल के बेड़ों पर निर्भरता को कम करेगा और भारत को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करेगा।
विक्रम VT-21 केवल एक सैन्य मशीन नहीं है, बल्कि यह भारतीय वैज्ञानिकों के कौशल और राष्ट्र की अखंडता की रक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। जैसे-जैसे वैश्विक सामरिक समीकरण बदल रहे हैं, ऐसे शक्तिशाली और बुद्धिमान युद्धक वाहनों का बेड़े में शामिल होना समय की मांग है। 2029 में जब यह वाहन आधिकारिक तौर पर अग्रिम मोर्चों पर अपनी सेवा शुरू करेगा, तब भारतीय सेना की युद्ध क्षमता एक नए गौरवशाली युग में प्रवेश करेगी। यह गौरवशाली भविष्य की ओर बढ़ता हुआ वह कदम है जो सीमाओं पर सुरक्षा के कवच को और भी अभेद्य बना देगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
