भारतीय सेना के खिलाफ षड्यंत्र? AI से बनाया गया सेना प्रमुख का फर्जी वीडियो...
सोशल मीडिया पर वायरल जनरल उपेंद्र द्विवेदी का वीडियो पूरी तरह फर्जी पाया गया। PIB की फैक्ट-चेक यूनिट ने स्पष्ट किया कि यह AI-जनित वीडियो है और न तो थलसेना प्रमुख ने ऐसा कोई बयान दिया, न ही सरकार ने कोई आदेश जारी किया। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने मंगलवार को गंभीर विवाद खड़ा कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के खिलाफ बयान दिया है। वीडियो में दिखाया गया कि मानो जनरल द्विवेदी यह आरोप लगा रहे हों कि केंद्र सरकार के आदेश पर गैर-जाति हिंदू सैनिकों को सेना से हटाया जा रहा है। यह दावा न केवल भय और भ्रम फैलाने वाला था, बल्कि देश की शीर्ष रक्षा व्यवस्था पर सीधा संदेह डालने की कोशिश भी कर रहा था।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की सच्चाई कुछ ही घंटों में सामने आ गई। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट-चेक यूनिट ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो पूरी तरह AI-जनित है और इसका उद्देश्य सिर्फ जनता को गुमराह करना है। अधिकारियों के मुताबिक न तो जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा कोई बयान दिया है और न ही केंद्र सरकार ने सेना के किसी समुदाय-आधारित निष्कासन को लेकर कोई आदेश जारी किया है।
सरकारी स्रोतों ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना की प्रतिष्ठा से जुड़े विषयों पर भ्रामक सामग्री फैलाना देश के हित के खिलाफ है। फैक्ट-चेक यूनिट ने इस वीडियो की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के दौरान कई ऐसे संकेत पाए, जिनसे सिद्ध हुआ कि वीडियो में इस्तेमाल आवाज, चेहरे की गतियाँ और संवाद—सभी कृत्रिम तरीके से तैयार किए गए थे।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी संवेदनशील जानकारी पर सहज विश्वास न करें और उसे साझा करने से पहले विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित अवश्य करें। अधिकारियों ने यह भी चेताया कि गलत सूचना का प्रसार समाज में अविश्वास, भय और अस्थिरता फैला सकता है, इसलिए ऐसी सामग्री से सतर्क रहना समय की जरूरत है।
फर्जी वीडियो के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन जांच एजेंसियाँ इस मामले में डिजिटल स्रोतों की पड़ताल कर रही हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी प्रकार की दुष्प्रचार मुहिम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि AI तकनीक का दुरुपयोग कितना बड़ा खतरा बन सकता है और क्यों डिजिटल साक्षरता और सत्यापन आज के समय में अनिवार्य हो गए हैं। जनता को जागरूक रहते हुए यह समझना होगा कि हर वायरल सामग्री सच नहीं होती और सुरक्षा से जुड़े विषयों में विशेष सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
