मेरठ/हापुड़ | 20 मार्च, 2026

भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की दिल्ली यूनिट ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भारत की बेहद संवेदनशील जगहों की जानकारी साझा करने का गंभीर आरोप है। सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी ने संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया है।

कौन हैं आरोपी और कैसे पकड़े गए?

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अजीम राणा और उसके भतीजे आजाद राजपूत के रूप में हुई है। अजीम राणा हापुड़ के धौलाना इलाके का रहने वाला है, जबकि आजाद राजपूत मेरठ के जई गांव का निवासी है।

हापुड़ के एसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली आईबी की टीम काफी समय से इन दोनों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद गुरुवार को एक संयुक्त कार्रवाई में इन्हें धर दबोचा गया।

इन जगहों की भेज रहे थे तस्वीरें और लोकेशन

जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने दिल्ली और एनसीआर (NCR) के कई महत्वपूर्ण और धार्मिक स्थलों की जासूसी की थी। पुलिस के अनुसार, इन्होंने निम्नलिखित स्थानों के फोटो, वीडियो और सटीक लोकेशन पाकिस्तान भेजी थी:

  • दिल्ली स्थित प्रसिद्ध सनातन धर्म मंदिर।
  • ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव स्थित रावण मंदिर।
  • इन मंदिरों के आसपास के संवेदनशील इलाके।

आरोपियों ने इसी साल 19 फरवरी को इन जगहों की विजुअल डिटेल्स अपने हैंडलर को भेजी थीं। आशंका जताई जा रही है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था।

पुर्तगाल और पाकिस्तान से जुड़े तार

जांच में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब यह पता चला कि ये दोनों आरोपी सोशल मीडिया के जरिए शहजाद भट्टी नाम के एक गैंगस्टर और हैंडलर के संपर्क में थे। शहजाद भट्टी पाकिस्तान से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा है।

अजीम राणा की भट्टी से पहली मुलाकात 2025 में एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए हुई थी। शुरुआत में वे सामान्य बातचीत और कंटेंट साझा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे भट्टी ने अजीम को लालच देकर जासूसी के दलदल में धकेल दिया। इसके बाद अजीम ने अपने भतीजे आजाद को भी इस काम में शामिल कर लिया।

सोशल मीडिया बना जासूसी का हथियार

यह मामला इस बात का भी प्रमाण है कि विदेशी ताकतें किस तरह भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए निशाना बना रही हैं।

  • संपर्क: फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर दोस्ती के जरिए संपर्क साधना।
  • लालच: शुरुआत में छोटे कामों के लिए पैसे देना।
  • ट्रैप: एक बार जानकारी भेजने के बाद ब्लैकमेल करना या बड़े वित्तीय लाभ का लालच देकर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना।


सुरक्षा एजेंसियों की अगली रणनीति

आईबी और यूपी पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन दोनों को इस जासूसी के बदले कोई बड़ी रकम मिली थी। इनके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्होंने और कितनी जगहों की जानकारी पाकिस्तान भेजी है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर कुछ और लोग भी शामिल हैं। हापुड़ और मेरठ के आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।

सतर्कता

यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारे स्मार्टफोन के भीतर भी जरूरी है। अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर जुड़ना और देश की महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है

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