सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का हवाई दौरा; भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों पर चर्चा
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हवाई में जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग मजबूत करने पर मंथन किया।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी (दाएं) हवाई में अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांडिंग जनरल रोनाल्ड पी. क्लार्क (बाएं) को स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए।
General Upendra Dwivedi US Hawaii visit 2026 : वैश्विक कूटनीति के मानचित्र पर हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की बढ़ती संवेदनशीलता के बीच भारत और अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐसी जुगलबंदी तैयार की है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के समीकरणों को सदा के लिए बदल सकती है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अमेरिका के हवाई (Hawaii) स्थित सैन्य ठिकानों की यात्रा ने इस रणनीतिक साझेदारी को एक नई और आक्रामक धार दी है। होनोलूलू के फोर्ट शैफ्टर में भव्य 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य केंद्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक साझा सैन्य विजन तैयार करना रहा है। जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी सेना के पैसिफिक कमांडिंग जनरल, रोनाल्ड पी. क्लार्क के साथ बंद कमरे में उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें दोनों महाशक्तियों के बीच रक्षा सहयोग को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
इस दौरे की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी जनरल द्विवेदी द्वारा ओहू द्वीप (Oahu Island) का किया गया हवाई दौरा रहा। इस टोही यात्रा के माध्यम से सेना प्रमुख ने न केवल अमेरिकी सैन्य प्रशिक्षण ईकोसिस्टम को करीब से परखा, बल्कि बहु-क्षेत्रीय परिचालन तत्परता (Multi-Domain Operational Readiness) की बारीकियों को भी समझा। यह सक्रियता दर्शाती है कि भारतीय थल सेना अब भविष्य के युद्धक्षेत्रों में अमेरिकी तकनीकों और प्रशिक्षण पद्धतियों के साथ तालमेल बिठाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। भारतीय सेना के एडीजीपीआई (ADGPI) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह संवाद केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें भविष्य की क्षेत्रीय चुनौतियों और प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को बढ़ाने के ठोस रोडमैप पर गहन मंथन किया गया।
सेना प्रमुख की यह यात्रा भारत-अमेरिका के बीच जारी उस वृहद रक्षा संवाद का हिस्सा है, जिसकी नींव इस महीने की शुरुआत में वायुसेना प्रमुखों की मुलाकात से रखी गई थी। गौरतलब है कि 8 अप्रैल को भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पेंटागन में अमेरिकी वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ रणनीतिक मंथन किया था। उस वार्ता के दौरान एमक्यू-9बी स्काई गार्डियन (MQ-9B Sky Guardian) ड्रोन की खरीद और उनके प्रभावी संचालन को लेकर महत्वपूर्ण तकनीकी आश्वासन दिए गए थे। वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि वह भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और भविष्य के प्रशिक्षण अवसरों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है। कोलोराडो के पीटरसन स्पेस फोर्स बेस से लेकर हवाई के फोर्ट शैफ्टर तक, यह पूरा घटनाक्रम एक 'स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत' की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर उभर रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
