सातारा: महाराष्ट्र के सातारा जिले में नियति का एक ऐसा क्रूर खेल देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। यहां भारतीय सेना के एक जवान की सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु के महज कुछ ही घंटों बाद उनके घर में बेटी का जन्म हुआ। खुशियों के मातम में बदलने की यह दास्तान तब और भी हृदयविदारक हो गई, जब जवान के अंतिम संस्कार में उनकी पत्नी को अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर लाया गया। आठ घंटे की नवजात बच्ची को गोद में लिए मां ने जब अपने पति को अंतिम विदाई दी, तो वहां मौजूद हर आंख से आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा।

पितृत्व अवकाश पर घर आए थे जवान

लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के 32 वर्षीय जवान प्रमोद परशुराम जाधव अपनी पत्नी की डिलीवरी के वक्त उनके पास रहने के लिए 8 दिनों की छुट्टी लेकर अपने गांव आए थे। शुक्रवार को जब वे सातारा के वाडेगांव फाटा के पास से गुजर रहे थे, तभी उनकी मोटरसाइकिल की टक्कर एक पिकअप ट्रक से हो गई। इस भीषण हादसे में प्रमोद जाधव ने अपनी जान गंवा दी। परिवार जो नन्हें मेहमान के स्वागत की तैयारियों में जुटा था, उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।



पिता के साये के बिना दुनिया में आई बेटी

इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक बात यह रही कि प्रमोद की मृत्यु के कुछ ही घंटों बाद, शनिवार की सुबह उनकी पत्नी ऋतुजा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। एक तरफ घर का चिराग बुझ गया था, तो दूसरी तरफ लक्ष्मी का आगमन हुआ था। यह वह समय था जब खुशी और गम के बीच का फासला मिट सा गया था और परिवार गहरे सदमे में डूब गया।

अंतिम संस्कार का वह मार्मिक दृश्य

रविवार को सातारा के डरे गांव में जवान प्रमोद जाधव का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। गांव की सड़कें लोगों की भीड़ से पटी हुई थीं। तिरंगे में लिपटे ताबूत पर फूल-मालाएं चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई।

अंतिम विदाई के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया जब:

  • प्रमोद की पत्नी ऋतुजा को एंबुलेंस से सीधे शमशान घाट लाया गया।
  • प्रसव के कारण चलने में असमर्थ ऋतुजा को स्ट्रेचर पर लिटाकर पति के पार्थिव शरीर के पास लाया गया।
  • उनकी गोद में महज कुछ घंटे पहले जन्मी वह बेटी थी, जिसे उसके पिता कभी देख न सके।
  • पत्नी और नवजात बच्ची को देख वहां मौजूद सेना के अधिकारियों, ग्रामीणों और परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और पूरा माहौल चीत्कार से गूंज उठा।

एक समर्पित सैनिक की विदाई

पड़ोसियों और साथी जवानों के अनुसार, प्रमोद 2014 में सेना में शामिल हुए थे। वे एक समर्पित सैनिक और बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। उनका जाना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हमारे सैनिक चाहे सीमा पर हों या घर पर, जीवन की अनिश्चितताओं का सामना किस प्रकार करते हैं। गमगीन माहौल के बीच नम आंखों से प्रमोद जाधव को अंतिम विदाई दी गई।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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