The History Of Indian Coast Guard : भारत की विशाल समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, समुद्र में जीवन और संपत्ति की रक्षा तथा राष्ट्रीय समुद्री हितों की निगरानी के लिए गठित भारतीय तटरक्षक बल आज देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम स्तंभ बन चुका है। शांतिकाल में भारतीय समुद्री क्षेत्र की रक्षा के उद्देश्य से इसकी स्थापना 18 अगस्त 1978 को संसद द्वारा पारित तटरक्षक अधिनियम, 1978 के तहत संघ के एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में की गई थी।

“वयम् रक्षामः”—अर्थात हम रक्षा करते हैं—भारतीय तटरक्षक का आदर्श वाक्य इसके कर्तव्य और संकल्प को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। वर्तमान में इस बल की कमान महानिदेशक अनुराग गोपालन थपलियाल के हाथों में है। भारतीय तटरक्षक बल आज विश्व का चौथा सबसे बड़ा तटरक्षक बल माना जाता है।

इतिहास: आवश्यकता से जन्मा एक सशक्त समुद्री बल

भारत में तटरक्षक बल की अवधारणा का उद्भव 1 फरवरी 1977 को हुआ, जब यह महसूस किया गया कि समुद्र में राष्ट्रीय विधियों के प्रवर्तन और समुद्री सुरक्षा के लिए एक अलग, विशेषीकृत सेवा की आवश्यकता है। उद्देश्य यह था कि भारतीय नौसेना को उसके युद्धकालीन दायित्वों पर केंद्रित रखा जाए और शांतिकाल में विधि प्रवर्तन की जिम्मेदारी एक स्वतंत्र बल संभाले।

इस दिशा में पहला ठोस कदम सितंबर 1974 में उठाया गया, जब समुद्र में तस्करी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए के. एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। समिति ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों की तर्ज पर एक संगठित तटरक्षक सेवा की सिफारिश की।

इसके बाद 25 अगस्त 1976 को भारत का समुद्री क्षेत्र अधिनियम पारित हुआ, जिसके तहत भारत ने 2.01 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र पर अधिकार का दावा किया। इस अधिनियम ने समुद्र में जीवित और अजीवित संसाधनों के अन्वेषण और दोहन का अनन्य अधिकार भारत को प्रदान किया।

इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप 1 फरवरी 1977 से एक अंतरिम तटरक्षक संगठन अस्तित्व में आया और अंततः 18 अगस्त 1978 को भारतीय तटरक्षक बल का औपचारिक गठन हुआ।

ध्येय: समुद्र, संसाधन और मानव जीवन की रक्षा :

भारतीय तटरक्षक बल का मिशन वक्तव्य इसकी व्यापक जिम्मेदारियों को दर्शाता है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • भारतीय समुद्र तथा तेल, मत्स्य और खनिज सहित अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा।
  • समुद्र में संकटग्रस्त नाविकों की सहायता और जान-माल की रक्षा।
  • तस्करी, अवैध मछली शिकार, नशीले पदार्थों की तस्करी और समुद्री अपराधों से संबंधित कानूनों का प्रवर्तन।
  • समुद्री पर्यावरण, पारिस्थितिकी और दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण।
  • वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन और युद्धकाल में भारतीय नौसेना को सहयोग।

कर्तव्य और सेवाएं: समुद्री क्षेत्र में कानून का प्रहरी

भारतीय तटरक्षक बल भारत के समुद्री क्षेत्रों में लागू सभी राष्ट्रीय अधिनियमों के प्रवर्तन की प्रमुख संस्था है। इसकी प्रमुख सेवाएं और दायित्व निम्नलिखित हैं—

  • कृत्रिम द्वीपों, अपतटीय संस्थापनाओं और अन्य समुद्री संरचनाओं की सुरक्षा।
  • मछुआरों की सुरक्षा और समुद्र में आपदा के समय त्वरित सहायता।
  • समुद्री प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण।
  • तस्करी-रोधी अभियानों में सीमा शुल्क और अन्य एजेंसियों को सहयोग।
  • समुद्र में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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