दोस्ती की नई इबारत- भारत और नेपाल ने हाथ मिलाया, सीमा विवाद खत्म करने के लिए जीपीएस और ड्रोन से होगी सीमा की सटीक मैपिंग
भारत और नेपाल ने दशकों पुराने सीमा विवाद को हल करने के लिए एक महत्वपूर्ण संयुक्त सर्वे शुरू किया है। आधुनिक तकनीक और जीपीएस के जरिए पिलरों की मरम्मत और सीमा रेखा का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा। जानें कैसे यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती लाएगा।

India and Nepal have joined hands to resolve border disputes
नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित किया गया है। दोनों देशों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे छोटे-बड़े विवादों और भ्रम को दूर करने के लिए एक संयुक्त सीमा सर्वे (Joint Border Survey) की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस कदम का उद्देश्य सीमा रेखा को पूरी तरह स्पष्ट करना और भविष्य में होने वाले किसी भी क्षेत्रीय तनाव को जड़ से खत्म करना है।
आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस बार का सर्वे पारंपरिक तरीकों के बजाय पूरी तरह से डिजिटल और हाई-टेक होगा। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे टीम निम्नलिखित तकनीकों का उपयोग कर रही है:
- ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS): प्रत्येक सीमा स्तंभ (Border Pillar) की सटीक भौगोलिक स्थिति दर्ज करने के लिए।
- ड्रोन मैपिंग: दुर्गम इलाकों और नदी क्षेत्रों में सीमा की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए।
- डिजिटल डेटाबेस: दोनों देश एक साझा डिजिटल मैप तैयार करेंगे ताकि भविष्य में कोई मानवीय त्रुटि न हो।
सर्वे की आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। समय के साथ, कई प्राकृतिक कारणों और मानवीय गतिविधियों की वजह से सीमा पर स्थित पिलर (खंभे) या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या अपनी जगह से हट गए हैं। विशेष रूप से नदी क्षेत्रों (जैसे गंडक और शारदा नदी) में जलस्तर बदलने से सीमा की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसी स्पष्टता की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर अक्सर विवाद की स्थिति पैदा होती रही है।
अभियान के मुख्य लक्ष्य
संयुक्त सर्वे टीम ने अपने काम को तीन मुख्य चरणों में बांटा है:
- पिलरों की पहचान और मरम्मत: जो सीमा स्तंभ टूट गए हैं या गायब हो गए हैं, उन्हें फिर से स्थापित करना।
- अतिक्रमण की जांच: सीमा के 'नो-मैन्स लैंड' (Dasgaja) क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण या खेती की पहचान करना और उसे हटाना।
- विवादित क्षेत्रों का समाधान: कालापानी, लिंपियाधुरा और सुस्ता जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर तकनीकी डेटा एकत्र करना ताकि उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के लिए ठोस आधार मिल सके।
सुरक्षा और सहयोग का नया अध्याय
इस सर्वे में भारत की ओर से भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) और नेपाल का नापी विभाग (Department of Survey) मिलकर काम कर रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल (SSB) और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) इस टीम को सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल जमीन की पैमाइश नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बहाली का एक बड़ा जरिया है। सीमा स्पष्ट होने से न केवल तस्करी और अवैध घुसपैठ पर रोक लगेगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों का जीवन भी आसान होगा।
महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)
कुल सीमा लंबाई: लगभग 1,751 किलोमीटर।
- नो-मैन्स लैंड: सीमा के दोनों तरफ 10-10 गज की खाली जगह जिसे 'दसगजा' कहा जाता है।
- संयुक्त कार्य समूह (JWG): दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के स्तर पर इस सर्वे की रूपरेखा तैयार की गई है।
भारत-नेपाल संयुक्त सर्वे एक सकारात्मक दिशा में उठाया गया कदम है। यह दर्शाता है कि आपसी बातचीत और तकनीकी सहयोग के माध्यम से सबसे जटिल भौगोलिक विवादों को भी सुलझाया जा सकता है। यह न केवल दक्षिण एशिया में शांति स्थापित करेगा बल्कि आर्थिक गलियारों और व्यापारिक सुगमता के लिए भी नए रास्ते खोलेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
