पंजाब के जालंधर जिले के सीचेवाली गाँव में चानन सिंह और चानन कौर के घर एक ऐसे व्यक्तित्व का जन्म हुआ, जिसने अपनी अटूट श्रद्धा और कर्मठता से न केवल अध्यात्म बल्कि पर्यावरण संरक्षण की परिभाषा बदल दी। संत बलबीर सिंह सीचेवाल, जिन्हें आज दुनिया एक महान पर्यावरणविद् और राज्यसभा सांसद के रूप में जानती है, की जीवन यात्रा पंजाब के एक साधारण कृषि परिवार से शुरू हुई थी। डीएवी कॉलेज, नकोदर से अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और पंजाबी में शिक्षा प्राप्त करने वाले बलबीर सिंह का जीवन वर्ष 1981 में एक नया मोड़ ले आया, जब वे गाँव सीचेवाली स्थित श्री निर्मल कुटिया से जुड़े। 6 जून 1988 को संत अवतार सिंह के उत्तराधिकारी के रूप में निर्मल कुटिया की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सामाजिक सुधारों का जो सिलसिला शुरू किया, वह आज वैश्विक स्तर पर सराहा जाता है। 1990 के दशक में गाँवों में स्वच्छता अभियानों और जल स्रोतों के पुनरुद्धार से शुरू हुआ उनका सफर उस समय ऐतिहासिक बन गया जब उन्होंने सिखों के लिए धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'काली बेईं' नदी की सफाई का बीड़ा उठाया। यह वही स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी को आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था, लेकिन समय के साथ यह 160 किलोमीटर लंबी नदी अतिक्रमण, औद्योगिक कचरे और सीवेज के कारण दम तोड़ चुकी थी। संत सीचेवाल ने साल 2000 में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस नदी को पुनर्जीवित करने का चुनौतीपूर्ण कार्य शुरू किया और उनके निरंतर प्रयासों का ही परिणाम था कि जिस नदी का पानी काला और प्रदूषित हो चुका था, वह पुन: पीने योग्य बन गया।

पर्यावरण के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता ने 'सीचेवाल मॉडल' को जन्म दिया, जो जल शोधन, सीवरेज प्रणाली और सड़कों के निर्माण का एक आत्मनिर्भर ढांचा है। इस मॉडल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे न केवल पंजाब के 250 गाँवों में लागू किया गया, बल्कि केंद्र सरकार ने गंगा किनारे स्थित 1,657 गाँवों के लिए भी इसे अपनाने की घोषणा की। संत सीचेवाल का प्रकृति प्रेम केवल नदियों तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने सीचेवाली और सुल्तानपुर लोधी में पौधशालाएं स्थापित कीं, जहाँ से हर साल एक लाख पौधे मुफ्त वितरित किए जाते हैं। काली बेईं की सफलता के बाद, उन्होंने लुधियाना की बुद्ध दरिया (बुद्ध नाला) और कांजली वेटलैंड जैसी महत्वपूर्ण जल संरचनाओं को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जन आंदोलन चलाए। उनके इन निस्वार्थ प्रयासों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2017 में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया और वैश्विक स्तर पर 'टाइम पत्रिका' ने उन्हें 'हीरोज ऑफ द एनवायरनमेंट' की सूची में स्थान देकर उनके कद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।

आज संत बलबीर सिंह सीचेवाल न केवल एक आध्यात्मिक गुरु और पर्यावरण संरक्षक हैं, बल्कि राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हुए नीतिगत स्तर पर भी प्रकृति की आवाज बुलंद कर रहे हैं। समाज सेवा और पारिस्थितिकी संतुलन के बीच उन्होंने जो सामंजस्य बिठाया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक स्तंभ बना रहेगा। उनका जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो एक अकेला व्यक्ति भी जनभागीदारी के माध्यम से विलुप्त होती नदियों को जीवनदान दे सकता है और मानवता के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है।

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