NEET paper leak controversy 2026 : देश में इस समय परीक्षा प्रणाली की शुचिता को लेकर चारों तरफ बवाल मचा हुआ है और शुचिता का यह संकट अब सड़कों पर उतर आया है। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का गवाह बना है, जहां कॉकरोच जनता पार्टी ने देशव्यापी परीक्षा धांधली के खिलाफ अपना पहला मोर्चा खोल दिया है। यह राजनीतिक संगठन नीट-यूजी परीक्षा लीक विवाद समेत सीबीएसई, सीयूएटी और एसएससी-जीडी जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और धांधली पर सीधे तौर पर जवाबदेही की मांग कर रहा है। छात्रों और युवाओं के इस भारी आक्रोश के बीच अब देश के उस गौरवशाली इतिहास को खंगाला जा रहा है, जब देश की कमान ऐसे दिग्गज शिक्षा मंत्रियों के हाथ में थी जिनके पूरे कार्यकाल के दौरान गोपनीयता भंग होने का एक भी मामला सामने नहीं आया।

इस ऐतिहासिक सफरनामे में सबसे पहला और सबसे प्रभावशाली नाम भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का आता है, जिन्होंने साल 1947 से 1958 तक देश की शुरुआती शिक्षा प्रणाली को एक बेहद मजबूत और पारदर्शी ढांचा दिया था। उनके पूरे कार्यकाल के दौरान सख्त प्रशासनिक अनुशासन लागू रहा, जिसके चलते कभी भी किसी संगठित पेपर लीक की भनक तक नहीं लगी। आजाद का पूरा ध्यान देश में बुनियादी शैक्षणिक पहुंच का विस्तार करने और नए स्वतंत्र राष्ट्र के लिए एक अभेद्य परीक्षा तंत्र का निर्माण करने पर केंद्रित था। उन्होंने देश में उन उच्च शिक्षण संस्थानों की नींव रखी जो आज भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था के स्तंभ माने जाते हैं, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के विजन को आगे बढ़ाया, जिसने बाद में चलकर शिक्षा के अधिकार कानून का मार्ग प्रशस्त किया। महिला शिक्षा और ग्रामीण साक्षरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी दृढ़ थी कि उन्होंने सुदूर क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण उच्च शिक्षा परिषद की स्थापना करवाई।

मौलाना आजाद के बाद देश की परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता को अक्षुण्ण रखने का श्रेय पूर्व मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद अली करीम छागला को जाता है, जिन्होंने साल 1963 से 1966 तक देश के शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। न्यायिक पृष्ठभूमि से आने के कारण छागला नियमों, कानून और गोपनीयता के बेहद पक्के थे और उनके दौर में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं थी। उनके कार्यकाल में जहां एक तरफ केंद्रीय विद्यालय संगठन का व्यापक विस्तार हुआ और ऐतिहासिक कोठारी आयोग का गठन किया गया, वहीं दूसरी तरफ उनके पूरे प्रशासनिक सफर में किसी भी परीक्षा की गोपनीयता से समझौता होने का एक भी उदाहरण इतिहास में दर्ज नहीं है।

इसी मजबूत विरासत को आगे बढ़ाते हुए पी वी नरसिम्हा राव ने साल 1985 से 1988 तक तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, जिसके तहत उस समय शिक्षा विभाग कार्य करता था। उन्होंने ही देश को ऐतिहासिक नई शिक्षा नीति 1986 दी और ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए जवाहर नवोदय विद्यालयों की अभूतपूर्व शुरुआत की। नवोदय प्रवेश परीक्षाओं और अन्य केंद्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए राव ने सुरक्षा का ऐसा त्रि-स्तरीय और अभेद्य घेरा तैयार किया था कि उनके पूरे कार्यकाल में पेपर लीक का कोई एक भी मामला सामने नहीं आ सका।

आज जब देश की शीर्ष परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं और छात्र न्याय के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं, तब इन पूर्ववर्ती दिग्गजों का कार्यकाल यह साबित करता है कि मजबूत राजनैतिक इच्छाशक्ति और कड़े प्रशासनिक अनुशासन के बल पर परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष रखा जा सकता है। इतिहास के ये पन्ने वर्तमान व्यवस्था को यह सीख देते हैं कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों पर लगाम कसने के लिए नीतियों में ईमानदारी और क्रियान्वयन में कड़ाई कितनी जरूरी है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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