राजस्थान की वीर धरा पर साल 1896 में उदयपुर के कोल्यारी गांव में जन्मे मोतीलाल तेजावत एक ऐसे जननायक के रूप में उभरे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन भीलों, गरासियों और खेतिहर मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने उस दौर में आदिवासियों के भीतर स्वाभिमान की लौ जलाई जब वे रियासती शोषण और बेगार प्रथा की बेड़ियों में जकड़े हुए थे। तेजावत जी ने महसूस किया कि जब तक शोषित वर्ग एकजुट नहीं होगा, तब तक उनकी स्थिति में सुधार संभव नहीं है, इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने साल 1920 में मातृकुंडिया के पावन स्थल से ऐतिहासिक 'एकी आंदोलन' की शुरुआत की। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों और किसानों को एकजुट कर उन्हें अनुचित करों और सामंती उत्पीड़न से मुक्ति दिलाना था। उन्होंने न केवल किसानों से जबरन कराई जाने वाली बेगार (बिना वेतन के काम) को समाप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष किया, बल्कि मजदूरों को उनका उचित पारिश्रमिक दिलाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।

उनके नेतृत्व की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 7 मार्च, 1922 को विजयनगर राज्य के नीमड़ा गांव में जब उनके आह्वान पर एक विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ, तो ब्रिटिश हुकूमत और रियासती सेनाएं कांप उठीं। वहां हुई अंधाधुंध फायरिंग में सैकड़ों आदिवासी शहीद हुए, जिसे इतिहास में 'नीमड़ा हत्याकांड' के रूप में दर्ज किया गया, लेकिन इस दमन के बावजूद तेजावत जी का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने गरासिया जनजाति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागृति फैलाई। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी उनकी सेवा का सफर थमा नहीं और उन्होंने उदयपुर व चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से लोकसभा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं। राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया। 14 जनवरी, 1969 को इस महान विभूति ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके द्वारा बोए गए समानता और एकता के बीज आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं।

मोतीलाल तेजावत केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि एक समाज सुधारक और आदिवासियों के संरक्षक थे, जिनकी विरासत आज भी राजस्थान के लोक गीतों और इतिहास के पन्नों में जीवंत है। उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि निस्वार्थ भाव से किया गया सामूहिक प्रयास बड़े से बड़े साम्राज्य की नींव हिला सकता है।

Pratahkal HQ

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