कौन थे कमला बेनीवाल? राजस्थान की पहली महिला मंत्री और संघर्ष की मिसाल
राजस्थान की पहली महिला उपमुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी कमला बेनीवाल का 97 वर्ष की आयु में निधन, जानिए उनके पांच दशक लंबे राजनीतिक सफर और उपलब्धियों के बारे में।

भारतीय राजनीति के फलक पर कमला बेनीवाल का नाम एक ऐसी ओजस्वी महिला नेता के रूप में अंकित है, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की वेदी से लेकर आधुनिक भारत के प्रशासनिक गलियारों तक अपनी अमिट छाप छोड़ी। 12 जनवरी 1927 को राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गोरिर गाँव में एक हिंदू जाट परिवार में जन्मी कमला बेनीवाल के व्यक्तित्व का निर्माण उनके पिता के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति समर्पण और राष्ट्रभक्ति के साये में हुआ। मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में, जब देश 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' के नारों से गूंज रहा था, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गईं और सक्रिय रूप से स्वाधीनता आंदोलन का हिस्सा बनीं। उनकी शैक्षणिक यात्रा भी उतनी ही प्रभावशाली रही; उन्होंने वनस्थली विद्यापीठ से कला स्नातक और जयपुर के महाराजा कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की, जिसने उनके राजनीतिक विजन को एक ऐतिहासिक और बौद्धिक आधार प्रदान किया।
स्वतंत्रता के पश्चात, उनका विधिवत राजनीतिक सफर 1954 में शुरू हुआ जब उन्होंने आमेर निर्वाचन क्षेत्र से उपचुनाव जीता। यह क्षण राजस्थान के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि मात्र 27 वर्ष की आयु में वे राज्य की पहली महिला मंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सात बार विधानसभा चुनाव जीतकर लगभग पांच दशकों तक राजस्थान की राजनीति की धुरी बनी रहीं। 1980 से 2003 के बीच उन्होंने चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, राजस्व और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। उनकी प्रशासनिक दक्षता और वरिष्ठता का सम्मान करते हुए वर्ष 2003 में उन्हें राजस्थान की पहली महिला उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें 'ताम्रपत्र' से सम्मानित किया, जो उनके संघर्षमय जीवन का सबसे बड़ा प्रमाण था।
संसदीय राजनीति के बाद कमला बेनीवाल ने संवैधानिक पदों पर भी अपनी गरिमा बनाए रखी। वे त्रिपुरा, गुजरात और मिजोरम जैसे राज्यों की राज्यपाल नियुक्त की गईं, जहाँ वे पूर्वोत्तर के किसी राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली महिला बनीं। गुजरात की राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चा में रहा, जहाँ लोकायुक्त की नियुक्ति और कई विधायी मामलों को लेकर तत्कालीन राज्य सरकार के साथ उनके वैचारिक मतभेद और संवैधानिक अडिगता सुर्खियों में रहे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी उनकी कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया गया, जिसने उनके विधिक ज्ञान और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा को सिद्ध किया। 15 मई 2024 को उनका लंबी जीवन यात्रा के बाद निधन हो गया, लेकिन वे अपने पीछे महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक शुचिता की एक महान विरासत छोड़ गईं। कमला बेनीवाल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि राजस्थान के सामाजिक-राजनीतिक बदलाव की वह सशक्त नायिका थीं, जिन्होंने पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं के लिए सत्ता के द्वार खोले और आधुनिक भारत के निर्माण में अपना सर्वोच्च योगदान दिया।

