कौन थे जवाहरलाल नेहरू? आधुनिक भारत के वह शिल्पी जिन्होंने एक बिखरते राष्ट्र को भविष्य का सपना दिया।
कश्मीरी पंडित परिवार में जन्म से लेकर आजाद भारत के निर्माण और गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत तक पंडित नेहरू के जीवन का संपूर्ण विवरण।

4 नवंबर 1889 को इलाहाबाद के एक संपन्न कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे जवाहरलाल नेहरू केवल स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ही नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे स्वप्नद्रष्टा थे जिन्होंने औपनिवेशिक बेड़ियों में जकड़े भारत को एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य में परिवर्तित करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। मोतीलाल नेहरू और स्वरूप रानी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में नेहरू का शुरुआती जीवन अत्यधिक सुख-सुविधाओं के बीच बीता, जहाँ उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही निजी ट्यूटर्स के माध्यम से हुई। इसके पश्चात, वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए, जहाँ उन्होंने हैरो स्कूल और ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से अपनी पढ़ाई पूरी की और इनर टेम्पल से कानून की उपाधि प्राप्त कर एक बैरिस्टर के रूप में 1912 में भारत लौटे। हालांकि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत की शुरुआत करने के बावजूद, उनका मन जल्द ही देश की राजनीतिक परिस्थितियों और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर खिंच गया। 1916 में कमला कौल के साथ परिणय सूत्र में बंधने वाले नेहरू के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव महात्मा गांधी से मुलाकात के बाद आया, जिनके आदर्शों ने उन्हें पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय कर दिया।
नेहरू ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रगतिशील नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई और 1929 के लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ऐतिहासिक 'पूर्ण स्वराज' का संकल्प पेश किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कुल नौ बार जेल जाना पड़ा, जहाँ उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तकें 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिम्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' लिखीं, जो उनकी बौद्धिक गहराई और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी समझ का प्रमाण हैं। 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को जब दुनिया सो रही थी, तब नेहरू ने 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' (नियति से साक्षात्कार) जैसे कालजयी भाषण के साथ स्वतंत्र भारत की बागडोर संभाली। प्रधानमंत्री के रूप में उनके 16 वर्षों का कार्यकाल चुनौतियों से भरा था, जिसमें देश का विभाजन, रियासतों का एकीकरण और गांधीजी की हत्या जैसी त्रासदियाँ शामिल थीं। इसके बावजूद, उन्होंने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सुधारों की नींव रखी और आईआईटी, एम्स तथा भाखड़ा नांगल जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' का निर्माण कराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत कर शीतयुद्ध के दौर में भारत को एक स्वतंत्र आवाज दी। हालांकि उनके अंतिम वर्षों में चीन के साथ युद्ध और बिगड़ते स्वास्थ्य ने उन्हें काफी आघात पहुँचाया, लेकिन 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे में ढाल चुके थे।
आज जवाहरलाल नेहरू का व्यक्तित्व एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने विज्ञान, तकनीक और धर्मनिरपेक्षता को भारत की आत्मा में पिरोया। बच्चों के प्रति उनके अगाध प्रेम के कारण उनका जन्मदिन 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है और 'चाचा नेहरू' के रूप में वे आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं। उनकी सबसे बड़ी विरासत वह अटूट लोकतंत्र है, जो आज भी भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित करता है।

