इस्लाम के इतिहास में मार्गदर्शन और मानवता को सत्य की राह दिखाने वाले पवित्र पैगंबरों की एक समृद्ध श्रृंखला रही है, जिनमें हज़रत इलियास अलैहिस्सलाम का स्थान बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित माना जाता है।

इस्लामिक मान्यताओं और पवित्र ग्रंथ कुरान के अनुसार, मानव जाति को सीधे रास्ते पर लाने के लिए समय-समय पर जिन पच्चीस प्रमुख नबियों और रसूलों का विशेष रूप से वर्णन किया गया है, उनमें हज़रत इलियास भी शामिल हैं। ऐतिहासिक और इस्लामिक दस्तावेजों, विशेषकर 'क़िसास अल-अंबिया' जैसे ग्रंथों के आधार पर यह प्रमाणित होता है कि हज़रत इलियास का आगमन हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के बाद हुआ था। इतिहासकारों ने उनके वंश और वंशावली का गहन अध्ययन करते हुए उनके मूल को इलियास इब्न यासीन इब्न फखास इब्न याग्रा इब्न हारून से जोड़ा है, जो उनके सम्मानित और पवित्र पारिवारिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। आम तौर पर इतिहासकारों और विद्वानों का यह स्पष्ट मत है कि उन्हें विशेष रूप से सीरिया (शाम) के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सही मार्ग दिखाने, भटके हुओं को राह पर लाने और ईश्वरीय संदेश के प्रसार के लिए भेजा गया था।

हज़रत इलियास के जीवनकाल और उनकी शिक्षाओं का पवित्र कुरान की दो प्रमुख सूरतों में विशेष तौर पर जिक्र मिलता है, जो उनके आध्यात्मिक प्रभाव और उनकी धार्मिक प्रासंगिकता को पूरी तरह स्पष्ट करता है। कुरान की सूरह अल-अनाम (17:85) में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि और उन्होंने जकरिया, यह्या, ईसा और इलियास को भी हिदायत दी, जिनमें से हर एक बेहद योग्य, सदाचारी और नेक इंसान था। इसी तरह सूरह अस-साफ़्फ़ात (37:123-126) में उनके जीवन के सबसे बड़े संघर्ष और उनके मिशन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि बेशक इलियास भी अल्लाह के भेजे गए रसूलों में से एक थे। जब उन्होंने अपनी कौम और समाज के लोगों को संबोधित करते हुए पूरी दृढ़ता से कहा था कि क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते और क्या तुम 'बाल' (Ba'at) नाम के झूठे पूज्य को पुकारते हो और उस सबसे बेहतरीन पैदा करने वाले सृष्टिकर्ता को छोड़ देते हो, जो अल्लाह तुम्हारा भी रब है और तुम्हारे बाप-दादाओं का भी रब है। इस तरह हज़रत इलियास ने अपने पूरे जीवन में समाज में फैली कुरीतियों और मूर्तिपूजा जैसी प्रथाओं का कड़ा विरोध किया और लोगों को केवल एक सच्चे ईश्वर की इबादत करने का संदेश दिया।

मुस्लिम समुदाय और धार्मिक विद्वानों के बीच यह भी एक बेहद मजबूत और अटूट विश्वास रहा है कि हज़रत इलियास हमेशा जीवित रहेंगे और इस पृथ्वी पर मौजूद लोगों का निरंतर मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनके बारे में यह माना जाता है कि उन्हें ठीक उसी प्रकार धरती पर लोगों की हिदायत और सहायता करने की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिस तरह हज़रत ख़िज़्र अलैहिस्सलाम को संसार में लोगों को सही राह दिखाने का दायित्व सौंपा गया था। हज़रत इलियास का यह अटूट संघर्ष, सत्य के प्रति उनकी निष्ठा और समाज को सही दिशा देने का उनका अद्वितीय प्रयास उन्हें इतिहास का एक अमर चरित्र बनाता है, जिनकी शिक्षाएं और संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए बेहद प्रासंगिक, प्रेरणादायक और आदरणीय बने हुए हैं।

Pratahkal HQ

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