कौन थे हज़रत अल-यसा? जानिए कुरान में वर्णित इस महान पैगंबर का गौरवशाली इतिहास
हज़रत इलियास के खलीफा हज़रत अल-यसा के जीवन, बनी इसराइल के मार्गदर्शन और सूरह अन-आम व सूरह साद में दर्ज उनकी धार्मिक श्रेष्ठता का प्रामाणिक विवरण।

कुरान पाक में बेहद आदर और सम्मान के साथ याद किए गए पाक रूहों में हज़रत अल-यसा का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिन्होंने भटके हुए समाज को धर्म और सदाचार की राह दिखाने में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
इस्लामी इतिहास, ऐतिहासिक ग्रंथों और प्रसिद्ध पुस्तक 'क़िससुल अंबिया' के अनुसार, हज़रत अल-यसा महान पैगंबर हज़रत इलियास के चचेरे भाई थे, जिन्होंने न केवल उनके पारिवारिक संबल के रूप में बल्कि उनके परम शिष्य, नायब (उप-अधिकारी) और खलीफा के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई। जीवन के शुरुआती दौर से ही वे हज़रत इलियास के साथ साए की तरह रहे, जिससे उन्हें न केवल आध्यात्मिक ज्ञान मिला बल्कि अल्लाह की राह में आने वाली कठिनाइयों को सहने का धैर्य भी प्राप्त हुआ। हज़रत इलियास के इस दुनिया से पर्दा कर जाने के बाद, अल्लाह ने हज़रत अल-यसा को पैगंबर (नबी) के रूप में चुना और बनी इसराइल (इसराइल की संतान) के मार्गदर्शन की एक बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी। उन्होंने अपने इस पावन दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया और बनी इसराइल को ठीक उसी तरह सच्चाई, न्याय और एकेश्वरवाद के मार्ग पर आगे बढ़ाया, जिस तरह हज़रत इलियास ने उनका मार्गदर्शन किया था। उनके जीवन का सफर बड़े संघर्षों, अडिग विश्वास और समाज को सुधारने के अथक प्रयासों से भरा रहा, जिसका प्रमाण स्वयं पवित्र कुरान में मिलता है। पवित्र कुरान के दो अलग-अलग सूरहों में उनकी धार्मिक श्रेष्ठता और पावनता की गवाही दी गई है। सूरह अन-आम (6:86) में अल्लाह फरमाता है कि 'और इस्माइल, अल-यसा, यूनुस और लूत, हमने इनमें से हर एक को संसार के लोगों पर श्रेष्ठता दी', वहीं सूरह साद (38:48) में भी उनके उच्च दर्जे की तस्दीक करते हुए कहा गया है कि 'और इस्माइल, अल-यसा और ज़ुल-किफ़्ल को भी याद करो, ये सब भले लोगों में से थे'।
इतिहास के झरोखे में हज़रत अल-यसा का जीवन और उनके कार्य आज भी न्यायप्रियता और धर्मपरायणता के एक बेमिसाल प्रतीक के रूप में जीवित हैं, जो मानवता को सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।

