द्रौपदी की पुकार और कुरुक्षेत्र का महासंग्राम ; देखें Giampaolo Tomassetti की महाभारत सीरीज़
इटली के प्रसिद्ध कलाकार जियाम्पाओलो टोमासेट्टी ने महाभारत पर आधारित 25 भव्य पेंटिंग्स की श्रृंखला बनाकर भारतीय आध्यात्मिकता और यूरोपीय पुनर्जागरण कला का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। 5 वर्षों के अध्ययन और 12 वर्षों की मेहनत से तैयार इस संग्रह में कृष्ण, अर्जुन, कर्ण, द्रौपदी और कुरुक्षेत्र युद्ध के कई ऐतिहासिक प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया है।

महाभारत श्रृंखला की पेंटिंग (बाएं) और चित्रकार जियाम्पाओलो टोमासेट्टी (दाएं)
भारतीय महाकाव्य महाभारत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव भावनाओं, धर्म, युद्ध, त्याग और आध्यात्मिक संघर्ष की ऐसी गाथा है जिसने सदियों से कलाकारों और विचारकों को प्रेरित किया है। इसी प्रेरणा को अपनी कला का केंद्र बनाकर इटली के प्रसिद्ध कलाकार जियाम्पाओलो टोमासेट्टी ने एक ऐसा अद्भुत चित्रमाला-प्रकल्प तैयार किया, जिसने भारतीय पौराणिक कथाओं को यूरोपीय पुनर्जागरण शैली के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई।
इटली के टर्नी शहर में जन्मे जियाम्पाओलो टोमासेट्टी बचपन से ही चित्रकला की ओर आकर्षित थे। समय के साथ उनका झुकाव वैदिक दर्शन और भगवद्गीता की शिक्षाओं की ओर बढ़ा, जिसने उनके कला जीवन की दिशा ही बदल दी। 1980 के दशक में उन्होंने फ्लोरेंस में भक्ति वेदांत बुक ट्रस्ट (BBT) के लिए चित्रकार के रूप में कार्य किया, जो हरे कृष्ण और इस्कॉन आंदोलन से जुड़ा हुआ संगठन माना जाता है। बाद में वे इटली की इंटरनेशनल वैदिक आर्ट अकादमी के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे।
टोमासेट्टी की कला की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि उन्होंने यूरोपीय पुनर्जागरण काल की यथार्थवादी शैली को भारतीय आध्यात्मिक प्रतीकों और पौराणिक कथाओं के साथ बेहद प्रभावशाली तरीके से संयोजित किया। उनकी पेंटिंग्स में नाटकीय प्रकाश, गहरी भावनात्मक अभिव्यक्तियां और युद्ध व धर्म के बीच संघर्ष को अत्यंत जीवंत रूप में दर्शाया गया है। तेल रंगों, एक्रेलिक, वॉटरकलर, फ्रेस्को, मूर्तिकला और सिरेमिक माध्यमों में काम करने वाले टोमासेट्टी की कला को आलोचक “सिनेमाई”, “आध्यात्मिक” और “भावनात्मक रूप से तीव्र” बताते हैं।
उनकी सबसे चर्चित कृति महाभारत सीरीज़ है, जिसमें लगभग 22 से 25 विशाल ऑयल पेंटिंग्स शामिल हैं। यह परियोजना केवल एक कला संग्रह नहीं, बल्कि वर्षों की आध्यात्मिक साधना और अध्ययन का परिणाम मानी जाती है। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, टोमासेट्टी ने महाभारत को समझने और उसके पात्रों की मनोवैज्ञानिक व आध्यात्मिक गहराई को आत्मसात करने में लगभग 5 वर्ष लगाए, जबकि पूरी चित्रमाला को तैयार करने में करीब 12 वर्षों का समय लगा।
इस श्रृंखला में महाभारत के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को अत्यंत प्रभावशाली शैली में चित्रित किया गया है। जैसे की:
१. द्रौपदी की कृष्ण से प्रार्थना
२. कृष्ण का विराट रूप
३. भीम और हनुमान की भेंट (“ओ ब्रदर!”)
४. चक्रव्यूह में अभिमन्यु
५. कर्ण और कुंती
६. कृष्ण का द्वारका आगमन
टोमासेट्टी की इन कृतियों में केवल युद्ध या धार्मिक दृश्य नहीं, बल्कि पात्रों के भीतर चल रहे मानसिक और नैतिक संघर्ष को भी गहराई से दिखाया गया है। यही कारण है कि उनकी पेंटिंग्स को केवल कला नहीं, बल्कि महाभारत की आत्मा का दृश्य रूपांतरण कहा जाता है। उनकी कई कृतियां महाभारत आर्ट बुक, फ्लोरेंस स्थित म्यूजियम ऑफ स्पिरिचुअल आर्ट (MOSA) की वर्चुअल गैलरी और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित की जा चुकी हैं।
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को पश्चिमी कला शैली के माध्यम से विश्व मंच पर पहुंचाने वाले जियाम्पाओलो टोमासेट्टी की यह महाभारत श्रृंखला आज भी कला प्रेमियों, इतिहासकारों और आध्यात्मिक चिंतकों के लिए गहन आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह संग्रह केवल पेंटिंग्स का समूह नहीं, बल्कि दो महान सभ्यताओं, भारतीय आध्यात्मिकता और यूरोपीय कलात्मकता के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
