कौन थीं भंवरी देवी? राजस्थान की सियासत को दहला देने वाली एक अनसुनी दास्तां
राजस्थान की सहायक नर्स भंवरी देवी के साधारण जीवन, राजनीतिक रसूख, ब्लैकमेलिंग के आरोपों और उनके लापता होने से जुड़े घटनाक्रम का विस्तृत विवरण।

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ ब्लॉक के एक निर्धन परिवार में जन्मी भंवरी देवी का जीवन संघर्ष और महत्वाकांक्षाओं की एक ऐसी परतदार कहानी है, जिसने भारतीय राजनीति के कई दिग्गज चेहरों को बेनकाब कर दिया। भंवरी के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे और उनके पिता राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। अभावों के बीच पली-बढ़ी भंवरी ने सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की और महज 16 वर्ष की अल्पायु में उनका विवाह जोधपुर के बोरुंडा गांव के अमरचंद से कर दिया गया। अपने पिता के प्रोत्साहन पर भंवरी ने दाई (मिडवाइफरी) का प्रशिक्षण लिया और अंततः उसी विभाग में सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) के पद पर सरकारी नौकरी हासिल की। उनकी अंतिम नियुक्ति जोधपुर के जालीवाड़ा गांव के एक उप-केंद्र पर थी, लेकिन उनकी सक्रियता अस्पताल की दीवारों से कहीं आगे निकल चुकी थी। नर्स के रूप में काम करते हुए भंवरी का संपर्क सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के प्रभावशाली राजनेताओं और नौकरशाहों से हुआ, जहाँ उन्होंने तबादलों और नियुक्तियों के खेल में अपनी पैठ बना ली। यह उनके जीवन का वह मोड़ था जहाँ से उन्होंने रसूख और धन-दौलत की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया।
जल्द ही भंवरी देवी की जीवनशैली एक साधारण नर्स की सीमाओं को लांघकर विलासिता के चरम पर पहुँच गई। उन्होंने न केवल अपने मनचाहे पदों पर नियुक्तियां पाईं, बल्कि दूसरों के लिए भी मोटी रकम के बदले ये काम करवाने लगीं। सीबीआई की जांच और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उनके पास आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति, कई आलीशान मकान और गाड़ियां थीं। वे हर साल भारी मात्रा में सोने के आभूषण खरीदती थीं, जबकि उनके पति अमरचंद एक ड्राइवर के रूप में कार्य करते रहे और अक्सर शराब के नशे में डूबे रहने के कारण चर्चा में रहे। भंवरी और अमरचंद के तीन बच्चे थे, लेकिन भंवरी की महत्वाकांक्षाएं अब चुनावी राजनीति की ओर मुड़ चुकी थीं। उन्होंने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भोपालगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से टिकट की मांग की, और जब उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने अपने पास मौजूद उन साक्ष्यों का इस्तेमाल शुरू किया जो राजस्थान की सरकार को हिला देने वाले थे।
भंवरी देवी के पास तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा और विधायक मलखान सिंह बिश्नोई के साथ संबंधों की एक 52 मिनट की आपत्तिजनक वीडियो सीडी थी। मलखान सिंह के साथ उनके लंबे समय तक चले संबंधों के बीच उन्होंने यह दावा भी किया कि उनकी सबसे छोटी बेटी का पिता बिश्नोई ही है। उन्होंने बिश्नोई को धमकी दी कि यदि उन्हें 20 किलो सोने के आभूषण और उनकी सात वर्षीय बेटी की शादी के लिए 50 लाख रुपये नहीं दिए गए, तो वे 7 सितंबर 2011 को एक सामाजिक सम्मेलन में इस सच्चाई को उजागर कर देंगी। वे पितृत्व परीक्षण (DNA Test) के लिए भी पूरी तरह तैयार थीं। जब मंत्री मदेरणा ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो भंवरी ने सीडी का एक हिस्सा स्थानीय मीडिया में लीक कर दिया, जिससे पूरे राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया। इसके ठीक बाद 1 सितंबर 2011 को भंवरी देवी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गईं, जिसके बाद उनके पति ने आरोप लगाया कि मदेरणा के इशारे पर उनका अपहरण किया गया है। भंवरी देवी का जीवन और उनका अंत भारतीय राजनीति के उस स्याह पक्ष का प्रतीक बन गया, जहाँ महत्वाकांक्षा, सत्ता और अपराध का गठजोड़ किसी भी हद तक जा सकता है।

