कौन थे Bhagat Singh? आज़ाद हिंद के उस महानायक की गाथा जिसने अपनी शहादत से सोए हुए भारत को जगा दिया
23 वर्ष की आयु में देश के लिए बलिदान देने वाले भगत सिंह की विचारधारा, सांडर्स कांड और असेंबली बम कांड से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का विस्तृत विवरण।

27 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर जिले में जन्मे भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक प्रखर विचारक थे जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में फांसी के फंदे को चूमकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी। एक ऐसे परिवार में जन्मे जहां देशभक्ति रगों में दौड़ती थी, भगत सिंह ने बचपन से ही ब्रिटिश हुकूमत के अन्याय को करीब से देखा था और जलियांवाला बाग के नरसंहार ने उनके भीतर प्रतिशोध की उस अग्नि को प्रज्वलित किया जिसने आगे चलकर एक महान क्रांति का रूप ले लिया। उनकी यात्रा एक जागरूक छात्र से शुरू हुई जो महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित था, लेकिन चौरी-चौरा कांड के बाद आंदोलन वापस लिए जाने से उपजी निराशा ने उन्हें सशस्त्र क्रांति की ओर मोड़ दिया। उन्होंने 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' को 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) में बदलकर उसे एक समाजवादी विचारधारा प्रदान की और लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स का वध किया।
भगत सिंह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत हिंसा नहीं, बल्कि बहरी हो चुकी ब्रिटिश हुकूमत के कानों तक भारतीय जनता की आवाज़ पहुंचाना था, जिसे उन्होंने 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय विधानसभा में खाली बेंचों पर बम फेंककर और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाकर पूरा किया। उन्होंने भागने के बजाय अपनी गिरफ्तारी दी ताकि वे अदालत को अपनी क्रांतिकारी विचारधारा के प्रचार का मंच बना सकें। जेल के भीतर भी उनका संघर्ष थमा नहीं; उन्होंने भारतीय कैदियों के अधिकारों के लिए 116 दिनों की लंबी भूख हड़ताल की, जिसने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया। वे एक नास्तिक और मार्क्सवादी विचारक थे जिन्होंने जेल डायरी और 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' जैसे लेखों के माध्यम से समाजवाद और मानवीय समानता का संदेश दिया। 23 मार्च 1931 की शाम, तय समय से 11 घंटे पहले ही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी गई, लेकिन उनकी मृत्यु ने उन्हें एक ऐसे लोकनायक और प्रतीक में बदल दिया जिसके नाम की गूंज आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का ज्वार पैदा करती है। उनकी शहादत ने यह सिद्ध कर दिया कि व्यक्तियों को मारना आसान है, लेकिन उनके विचारों को कभी खत्म नहीं किया जा सकता।

