विश्व ओवेरियन कैंसर डे पर जानें क्यों पेट फूलने की समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक है। विशेषज्ञ बता रहे हैं ओवरी कैंसर के शुरुआती लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय।

symptoms of ovarian cancer : अक्सर सुबह उठते ही पेट में हल्का भारीपन, सूजन या कपड़ों का अचानक टाइट महसूस होना एक ऐसी स्थिति है जिसे अधिकांश महिलाएं रसोई की गैस या कल रात के भारी खाने का दोष देकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि जिसे आप अपच या साधारण सूजन समझकर घरेलू नुस्खों से दबा रही हैं, वह शरीर के भीतर पनप रहे एक घातक 'साइलेंट किलर' का संकेत हो सकता है? हर साल 8 मई को मनाया जाने वाला 'विश्व ओवेरियन कैंसर डे' हमें इसी कड़वी सच्चाई से रूबरू कराता है कि अंडाशय का कैंसर अक्सर अपने शुरुआती चरणों में कोई शोर नहीं मचाता, बल्कि बेहद सामान्य दिखने वाले लक्षणों के पीछे छिपकर शरीर को खोखला करता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ओवेरियन कैंसर को 'साइलेंट डिजीज' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण इतने साधारण होते हैं कि महिलाएं उन्हें हार्मोनल बदलाव, तनाव या उम्र का असर मान लेती हैं। यदि पेट फूलने की समस्या लगातार कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे और किसी भी घरेलू उपाय या पाचन की दवा से ठीक न हो, तो यह खतरे की घंटी है। ओवेरियन कैंसर से जुड़ा पेट फूलना आम गैस की तरह आता-जाता नहीं है, बल्कि यह निरंतर बना रहता है। महिलाएं अक्सर महसूस करती हैं कि बहुत कम खाने के बावजूद उनका पेट भरा-भरा लग रहा है और शरीर में एक अजीब सी सूजन बनी हुई है।

इस बीमारी की जटिलता यह है कि यह केवल पेट फूलने तक सीमित नहीं रहती। इसके साथ कुछ अन्य सूक्ष्म संकेत भी जुड़े होते हैं, जैसे पेल्विक एरिया में हल्का दर्द, भूख का अचानक कम हो जाना, बार-बार यूरिन जाने की आवश्यकता महसूस होना और पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में अत्यधिक कमजोरी और थकावट बने रहना। डॉक्टरों का स्पष्ट मत है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो हफ्ते से अधिक समय तक बना रहता है, तो उसे तत्काल चिकित्सकीय परामर्श और जांच के दायरे में लाना चाहिए। विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं, एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित मरीजों, या जिन परिवारों में ओवरी और ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक पहचान ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। यदि ओवेरियन कैंसर का पता पहली या दूसरी स्टेज में चल जाए, तो आधुनिक सर्जरी, कीमोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी के माध्यम से इलाज के सफल होने की दर काफी अधिक हो जाती है। बचाव के लिए नियमित गाइनेकोलॉजिकल चेकअप, संतुलित वजन, सक्रिय जीवनशैली और धूम्रपान जैसी आदतों से दूरी बनाना अनिवार्य है। अंततः, अपने शरीर द्वारा दिए जा रहे संकेतों के प्रति संवेदनशीलता ही वह रेखा है जो जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। आज का दिन हमें यह याद दिलाने के लिए है कि जागरूकता ही वह मशाल है जिससे इस अदृश्य शत्रु को परास्त किया जा सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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