गाड़ी में बैठते ही उल्टी और चक्कर क्यों आते हैं? मोशन सिकनेस के पीछे छुपी बीमारी और शरीर का विज्ञान
कार, बस या हवाई यात्रा के दौरान उल्टी और चक्कर आना मोशन सिकनेस का संकेत हो सकता है। यह समस्या तब होती है जब आंखें, कान और दिमाग अलग-अलग संकेत भेजते हैं। जानिए मोशन सिकनेस क्या है, इसके कारण और शरीर के संतुलन से इसका क्या संबंध है।

motion sickness kya hoti hai hindi : यात्रा को आमतौर पर सुकून और रोमांच से जोड़ा जाता है, लेकिन कई लोगों के लिए सफर शुरू होते ही यह परेशानी का सबब बन जाता है। कार, बस, ट्रेन, जहाज या हवाई यात्रा के दौरान अचानक उल्टी, चक्कर, सिरदर्द या बेचैनी महसूस होना एक आम लेकिन अनदेखी समस्या है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को मोशन सिकनेस कहा जाता है, जो हर तीन में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी प्रभावित करती है।
मोशन सिकनेस केवल बच्चों या बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है और कई मामलों में यात्रा शुरू होते ही इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। अक्सर लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि यह समस्या सिर्फ उनके साथ ही क्यों होती है, लेकिन इसके पीछे शरीर और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ने की एक स्पष्ट वैज्ञानिक वजह होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोशन सिकनेस तब होती है जब आंखें, कान और शरीर दिमाग को एक जैसी जानकारी नहीं भेज पाते। उदाहरण के तौर पर, जब कोई व्यक्ति चलती कार में बैठकर मोबाइल फोन देखता है या किताब पढ़ता है, तो उसकी आंखें दिमाग को यह संकेत देती हैं कि शरीर स्थिर है। वहीं कान के भीतर मौजूद संतुलन बनाने वाला तंत्र यह संदेश भेजता है कि शरीर गति में है। इन परस्पर विरोधी संकेतों से दिमाग भ्रमित हो जाता है और शरीर इसे किसी जहरीली चीज की प्रतिक्रिया मान लेता है, जिसका नतीजा मतली या उल्टी के रूप में सामने आता है।
मानव शरीर में मौजूद संतुलन प्रणाली, जिसे वेस्टिबुलर सिस्टम कहा जाता है, इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है। आंखों, कानों और शरीर के भीतर मौजूद रिसेप्टर्स लगातार दिमाग को स्थिति की जानकारी भेजते हैं। जब सफर के दौरान यह जानकारी मेल नहीं खाती, तो दिमाग का ब्रेन स्टेम और हाइपोथैलेमस हिस्सा सक्रिय हो जाता है। इसी असंतुलन के कारण चक्कर, बेचैनी और उल्टी जैसे लक्षण उभरते हैं। इस तरह मोशन सिकनेस को संतुलन प्रणाली की गड़बड़ी का प्रत्यक्ष परिणाम माना जाता है।
सफर के दौरान उल्टी आने के पीछे केवल गाड़ी की गति ही जिम्मेदार नहीं होती। पेट की स्थिति और यात्रा का तरीका भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। खाली पेट यात्रा करने से पेट की वेगस नर्व अधिक सक्रिय हो जाती है, जिससे चक्कर और मतली बढ़ सकती है। वहीं भारी भोजन के तुरंत बाद सफर करने पर भी उल्टी की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा ऊबड़-खाबड़ सड़कें, पहाड़ी रास्ते, वाहन के झटके और गाड़ी के अंदर तेज या अप्रिय गंध भी मोशन सिकनेस को गंभीर बना सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि सफर के दौरान कान के भीतर मौजूद तरल पदार्थ हिलता है, जिससे गर्दन और खोपड़ी में हल्का कंपन पैदा होता है। यही कंपन दिमाग के संतुलन को प्रभावित करता है और मतली या उल्टी का कारण बनता है। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या यात्रा को बेहद असहज बना सकती है और व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर सकती है।
मोशन सिकनेस को समझना और उसके लक्षणों को पहचानना इसलिए जरूरी है ताकि समय रहते सावधानी बरती जा सके। यह समस्या भले ही जानलेवा न हो, लेकिन लगातार होने पर दैनिक जीवन और यात्रा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। सही जानकारी और संतुलित दिनचर्या के साथ इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
