जहां कभी डर था, वहां अब विश्वास है, पोलियो-मुक्त भारत के 15 वर्ष: सार्वजनिक स्वास्थ्य में ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न
भारत ने पोलियो-मुक्त रहने के 15 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह सफलता सरकार, WHO और लाखों स्वास्थ्यकर्मियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह मील का पत्थर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल बन चुका है।

नई दिल्ली | 14 जनवरी 2026
भारत ने आज पोलियो-मुक्त रहने के 15 वर्ष पूरे कर लिए हैं—यह उपलब्धि न केवल देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक प्रगति और सतत जागरूकता की भी मिसाल है। वर्ष 2011 में आखिरी पोलियो का मामला सामने आने के बाद से अब तक भारत ने इस गंभीर बीमारी को दोबारा पनपने से रोकने में सफलता पाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों से यह लक्ष्य संभव हो सका।
यह दिन भारत के स्वास्थ्य इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि कभी दुनिया में पोलियो के सबसे अधिक मामलों वाला देश आज पोलियो-मुक्त राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।
कैसे शुरू हुई यह ऐतिहासिक यात्रा?
1990 के दशक में भारत पोलियो के वैश्विक मानचित्र पर एक बड़े केंद्र के रूप में उभरा था। हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी का शिकार हो रहे थे। इसके बाद भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रीय पल्स पोलियो कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस अभियान के अंतर्गत:
घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाया गया
रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और मेलों में बूथ बनाए गए
दूरदराज़ इलाकों तक स्वास्थ्य कर्मियों की पहुंच सुनिश्चित की गई
माता-पिता में जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया
वैज्ञानिक और प्रशासनिक सहयोग
WHO के मानकों के अनुसार, किसी देश को पोलियो-मुक्त घोषित करने के लिए लगातार तीन वर्षों तक कोई भी नया मामला सामने नहीं आना चाहिए। भारत ने यह लक्ष्य 2014 में हासिल किया, जब उसे औपचारिक रूप से पोलियो-मुक्त घोषित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस सफलता के पीछे:
मजबूत निगरानी प्रणाली
रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग
तेज़ प्रतिक्रिया तंत्र
और अंतर-राज्यीय समन्वय
जैसे तत्वों की अहम भूमिका रही।
कानूनी और नीतिगत ढांचा
भारत में टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई नीतिगत कदम उठाए। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियमों के तहत, टीकाकरण को अनिवार्य बनाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष टीमें तैनात करने और संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग जैसे प्रावधान लागू किए गए।
इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए पोलियो टीकाकरण प्रमाणपत्र को भी अनिवार्य किया गया, जिससे वायरस के दोबारा प्रवेश की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
आज भी क्यों जरूरी है सतर्कता?
विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन तभी संभव है, जब दुनिया का हर देश इस बीमारी से मुक्त हो। कुछ देशों में अब भी छिटपुट मामले सामने आते रहते हैं, जिससे संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता है।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
नियमित टीकाकरण जारी रहेगा
सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत किया जाएगा
नए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका
आज भारत अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन चुका है। कई विकासशील देश भारत की रणनीतियों को अपनाकर पोलियो उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारतीय वैक्सीन उत्पादन क्षमता और लॉजिस्टिक प्रबंधन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा जा रहा है।
समापन
पोलियो-मुक्त भारत के 15 वर्ष पूरे होना केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और सामूहिक प्रयास की जीत है। यह मील का पत्थर आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश देता है कि संगठित प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। भारत की यह सफलता वैश्विक स्वास्थ्य इतिहास में एक प्रेरक अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है।

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