e-cigarette health risks : लोकसभा के शीतकालीन सत्र में ताजा हंगामे की वजह बनी ई-सिगरेट। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि सदन के भीतर एक टीएमसी सांसद ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे थे, जो स्पष्ट रूप से नियमों के खिलाफ है। स्पीकर ने तुरंत स्पष्ट किया कि संसद भवन में किसी भी सांसद को ई-सिगरेट या किसी भी प्रकार के धूम्रपान की अनुमति नहीं है।

ई-सिगरेट, जिसे इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) भी कहा जाता है, एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसमें तंबाकू जलाने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें मौजूद लिक्विड गर्म होकर भाप में बदलती है, जिसे उपयोगकर्ता सांस के साथ अंदर खींचता है। हालांकि यह दिखने में सामान्य सिगरेट जैसी लगती है, इसमें मौजूद निकोटीन और केमिकल्स स्वास्थ्य के लिए उतने ही हानिकारक हैं।

भारत सरकार ने 2019 में ई-सिगरेट निषेध अधिनियम लागू किया। इस कानून के तहत ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, आयात-निर्यात, खरीद-फरोख्त और विज्ञापन पूरी तरह अवैध है। उल्लंघन करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर 1 साल तक जेल या 1 लाख रुपये तक जुर्माना, और पुनः दोषी पाए जाने पर 3 साल तक जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिगरेट कम खतरनाक नहीं है। इसमें मौजूद निकोटीन और अन्य रासायनिक तत्व हृदय रोग, प्रेग्नेंसी संबंधी जटिलताओं और लत लगने की संभावना बढ़ाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी ई-सिगरेट के दीर्घकालिक स्वास्थ्य खतरों को लेकर आगाह कर चुका है। संसद में उठे इस आरोप ने देशभर में ई-सिगरेट के कानूनी और स्वास्थ्य पहलुओं पर बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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