Causes of hypersexuality and brain dopamine imbalance : यौन इच्छा मानवीय स्वभाव का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन क्या होगा जब यह इच्छा एक बेकाबू जुनून में बदल जाए और व्यक्ति के आत्म-नियंत्रण की सीमाओं को तोड़ दे? चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को 'निम्फोमेनिया' कहा जाता है। यह कोई सामान्य शारीरिक चाहत नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक और व्यवहारिक विकार है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का अपने मस्तिष्क और शरीर पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है। हालिया शोध बताते हैं कि यह समस्या व्यक्ति के करियर, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखती है।


हवस नहीं, यह एक 'बाध्यकारी व्यवहार' है :

निम्फोमेनिया (Nymphomania) से ग्रस्त व्यक्ति के लिए शारीरिक संबंध बनाना सुखद अनुभव के बजाय एक 'मजबूरी' या 'बाध्यकारी व्यवहार' (Compulsive Behavior) बन जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में व्यक्ति को एक दिन में 10 से 12 बार शारीरिक संबंध बनाने की तीव्र इच्छा होती है। यदि यह इच्छा पूरी न हो, तो व्यक्ति अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन और मानसिक अवसाद का शिकार हो जाता है।

इस बीमारी के मुख्य लक्षण :

  • अनियंत्रित इच्छाएं: चाहकर भी शारीरिक गतिविधियों पर लगाम न लगा पाना।
  • लगातार कल्पनाएं: मस्तिष्क में 24 घंटे यौन विचार और कल्पनाओं का चलते रहना, जिससे कार्यक्षमता शून्य हो जाती है।
  • जोखिम भरा आचरण: परिणामों की चिंता किए बिना अपरिचितों के साथ असुरक्षित संबंध बनाना।
  • सामाजिक अलगाव: रिश्तों में कड़वाहट आना और नौकरी या करियर में विफलता मिलना।

स्त्री और पुरुष: नाम अलग, दर्द एक

चिकित्सा जगत में महिलाओं में इस स्थिति को 'निम्फोमेनिया' कहा जाता है, जबकि पुरुषों में इसी समान व्यवहार को 'सैटेराइसिस' (Satyriasis) के नाम से जाना जाता है। आधुनिक शब्दावली में इसे 'हाइपरसेक्सुअलिटी डिसऑर्डर' या 'सेक्स एडिक्शन' के दायरे में रखा गया है।

क्यों बिगड़ता है दिमागी संतुलन ?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति अचानक उत्पन्न नहीं होती। इसके पीछे गहरे जैविक और मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं:

  • न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन: मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे रसायनों का स्तर बिगड़ने से इच्छाएं अनियंत्रित हो जाती हैं।
  • मानसिक आघात: बचपन में हुआ यौन उत्पीड़न या कोई गहरा मानसिक सदमा व्यक्ति को इस विकार की ओर धकेल सकता है।
  • तनाव: अत्यधिक मानसिक दबाव हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे व्यक्ति 'एस्केप मैकेनिज्म' के तौर पर इस लत का सहारा लेने लगता है।

इलाज और रिकवरी: चिकित्सा विज्ञान की राह

हालांकि इसे वैश्विक स्तर पर पूरी तरह एक स्वतंत्र बीमारी के रूप में वर्गीकृत करने पर बहस जारी है, लेकिन इसके उपचार के पुख्ता तरीके मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) इसमें सबसे प्रभावी साबित होती है। इसके अलावा, डॉक्टर कुछ ऐसी दवाएं (Mood Stabilizers) भी देते हैं जो मस्तिष्क के बाध्यकारी व्यवहार को नियंत्रित करती हैं। सपोर्ट ग्रुप्स और मनोचिकित्सकों की सलाह से इस दलदल से बाहर निकलना संभव है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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