italian pizza healthy daily consumption : भारत में पिज्जा और अन्य फास्ट फूड को अक्सर अस्वास्थ्यकर माना जाता है। अत्यधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, यह धारणा इटली में पिज्जा खाने वाले लोगों पर लागू नहीं होती। इटालियन लोग पिज्जा को अपनी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाते हैं और इसके बावजूद वे दुनिया के सबसे स्वस्थ देशों में शामिल हैं।

ब्लूमबर्ग हेल्दीएस्ट कंट्री इंडेक्स (2017–2019) के अनुसार, इटली स्वास्थ्य के मामले में शीर्ष पर रहा है। इटालियन पिज्जा भारतीय पिज्जा से काफी अलग है। यह जंक फूड की श्रेणी में नहीं आता बल्कि संतुलित पोषण का हिस्सा होता है। इटालियन लोग पिज्जा के साथ सलाद और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं, जिससे उनकी डाइट पूरी तरह संतुलित रहती है।

इटालियन पिज्जा की सबसे बड़ी खासियत इसके सामग्री और तैयारी में है। ताजी सब्जियां, उच्च गुणवत्ता की मोत्जरेला चीज और ऑलिव ऑयल का उपयोग इसे स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। आटे को 24 घंटे से दो दिन तक फर्मेंट किया जाता है, जिससे कार्बोहाइड्रेट टूट जाते हैं और पाचन बेहतर होता है। पतला बेस और कम मैदा के कारण कैलोरी कम रहती है और यह आसानी से पच जाता है। प्रोसेस्ड चीज की जगह प्राकृतिक मोत्जरेला का इस्तेमाल शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है।

इटालियन पिज्जा की यह वैज्ञानिक रूप से संतुलित तैयारी और रोजमर्रा की डाइट में इसे शामिल करने की प्रथा दर्शाती है कि संतुलित भोजन और गुणवत्ता वाली सामग्री का चुनाव स्वास्थ्य बनाए रखने में कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय उपभोक्ता भी इससे सीख सकते हैं कि पिज्जा केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि सही तरीके से तैयार किया जाए तो यह स्वास्थ्य का भी मित्र बन सकता है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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