50+ पुरुषों को बड़ा खतरा; बिना लक्षणों वाला वो कैंसर, जो बन रहा है 'साइलेंट किलर'
भारत में पुरुषों के लिए 'साइलेंट किलर' बन रहा है प्रोस्टेट कैंसर। 50 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ने वाले इस रोग के 43% मामलों का पता आखिरी स्टेज में चलता है। जानें क्यों यूरिन में बदलाव और हड्डियों के दर्द को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। विशेषज्ञों की राय और पीएसए टेस्ट के महत्व के साथ प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर विस्तृत रिपोर्ट।

Symptoms of Prostate Cancer in Hindi : स्वास्थ्य जगत में इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है—एक ऐसी बीमारी जो बिना किसी आहट के शरीर के भीतर पनपती है और जब तक अपना वजूद जाहिर करती है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है। हम बात कर रहे हैं प्रोस्टेट कैंसर की, जो वर्तमान में भारतीय पुरुषों के लिए स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। फेफड़ों और मुंह के कैंसर के बाद, प्रोस्टेट कैंसर अब भारत में पुरुषों को प्रभावित करने वाला तीसरा सबसे घातक कैंसर बन गया है, जो विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु के वर्ग को अपना निशाना बना रहा है।
खतरे की भयावहता: जब तक पता चलता है, तब तक फैल चुका होता है संक्रमण
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो प्रजनन तंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसमें होने वाली कोशिका वृद्धि इतनी धीमी और गुप्त होती है कि सालों तक मरीज को इसका आभास भी नहीं होता। आंकड़ों की स्थिति डरावनी है:
- वैश्विक संकट: दुनिया भर में हर साल लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं।
- देरी से निदान: 'इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी' (2024) की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 43 प्रतिशत मामलों में इस कैंसर का पता तब चलता है जब यह शरीर के अन्य हिस्सों (Metastasis) तक फैल चुका होता है।
- आयु सीमा: 50 वर्ष की आयु के बाद इसके जोखिम में भारी वृद्धि होती है, जो 64 वर्ष की आयु के बाद अपने चरम पर पहुंच जाता है।
- जागरूकता का अभाव: उम्र का असर या कैंसर का संकेत?
भारत में इस बीमारी के घातक होने की सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी और सामाजिक संकोच है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पुरुष अक्सर शुरुआती लक्षणों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
शुरुआती चेतावनी :
रात में बार-बार यूरिन आना, यूरिन की धार का कमजोर होना या शुरू करने में कठिनाई महसूस होना इसके प्राथमिक संकेत हैं।
- गंभीर लक्षण: यूरिन या स्पर्म में खून आना, बिना वजह वजन कम होना, अत्यधिक थकान और पीठ या हड्डियों में लगातार बना रहने वाला दर्द इस बात का संकेत है कि कैंसर एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुका है।
- विशेषज्ञों की राय: 'बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया' (BPH) बनाम कैंसर
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार गोयल के अनुसार, बढ़ती उम्र में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (BPH) सामान्य हो सकता है, लेकिन इसके और कैंसर के लक्षणों में बारीक अंतर है। जहाँ BPH के लक्षण बहुत धीमी गति से बढ़ते हैं, वहीं कैंसर में लक्षणों की तीव्रता अधिक होती है और इसमें खून आने जैसे खतरनाक संकेत शामिल होते हैं। चिकित्सा जगत का स्पष्ट परामर्श है कि:
- नियमित जांच: 50 वर्ष के बाद हर पुरुष को 'पीएसए टेस्ट' (PSA Test) और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन कराना अनिवार्य होना चाहिए।
- पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में पहले किसी को यह बीमारी रही हो, तो स्क्रीनिंग 40 से 45 वर्ष की आयु से ही शुरू कर देनी चाहिए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
