चिकित्सा जगत की बड़ी राहत: ट्रंप के दावों के विपरीत 'पैरासिटामोल' गर्भावस्था में सुरक्षित, शोध ने 'ऑटिज्म' के डर को नकारा
वैज्ञानिक शोध में बड़ा खुलासा: गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल लेना पूरी तरह सुरक्षित है। ऑटिज्म और एडीएचडी के खतरों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और अन्य के दावों को शोध ने किया खारिज। जानें क्यों चिकित्सा विशेषज्ञ इस दवा को गर्भवती महिलाओं के लिए दर्द और बुखार का सबसे बेहतर विकल्प मानते हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

वाशिंगटन/लंदन: मातृत्व की दहलीज पर खड़ी महिलाओं के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जो वर्षों से उनके मन में पैठ जमाए डर को जड़ से खत्म कर देगी। हाल ही में प्रकाशित एक व्यापक वैश्विक अध्ययन ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल (Paracetamol) का सेवन करने से होने वाले बच्चे में 'ऑटिज्म' (Autism) या 'एडीएचडी' (ADHD) का खतरा बढ़ जाता है। यह शोध न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह उन विवादास्पद दावों के लिए भी एक कड़ी चुनौती है जिन्हें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कुछ वैकल्पिक चिकित्सा समूहों द्वारा हवा दी गई थी।
भ्रम बनाम शोध: वैज्ञानिक सत्य की जीत
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर यह बहस छिड़ी हुई थी कि क्या एक साधारण पेनकिलर (दर्द निवारक) आने वाली पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल और उसके बाद उनके समर्थकों द्वारा कई बार 'ऑटिज्म' के बढ़ते मामलों को दवाओं के दुष्प्रभाव से जोड़ा गया था।
- अध्ययन का दायरा: इस शोध में लाखों माताओं और उनके बच्चों के डेटा का कई वर्षों तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था में पैरासिटामोल ली, उनके बच्चों में ऑटिज्म की दर उन बच्चों के समान ही थी जिनकी माताओं ने यह दवा नहीं ली थी।
- अनुवांशिकी की भूमिका: वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि बच्चों में ऑटिज्म या न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों का मुख्य कारण अनुवांशिक (Genetic) और अन्य पर्यावरणीय कारक होते हैं, न कि पैरासिटामोल जैसी सुरक्षित दवाएं।
- बुखार का खतरा: शोध में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि गर्भवती महिला को बुखार होने पर पैरासिटामोल नहीं दी जाती है, तो उच्च शारीरिक तापमान भ्रूण के मस्तिष्क विकास के लिए अधिक घातक साबित हो सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर कड़ा प्रहार
डोनाल्ड ट्रंप और उनके स्वास्थ्य सलाहकारों ने अक्सर बिना किसी ठोस क्लिनिकल ट्रायल के दवाओं और टीकों को लेकर संदेह पैदा किए थे। उनके दावों ने दुनिया भर की माताओं के बीच एक 'पैनिक' (घबराहट) की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसके चलते कई महिलाओं ने दर्द और बुखार जैसी स्थिति में भी आवश्यक उपचार लेना बंद कर दिया था। इस नए शोध ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि विज्ञान भावनाओं या राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और साक्ष्यों से संचालित होता है।
आधिकारिक चिकित्सा दिशा-निर्देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न देशों के राष्ट्रीय स्वास्थ्य निकायों ने इस अध्ययन के बाद अपनी एडवायजरी को पुनः पुष्ट किया है:
- सुरक्षित मात्रा: पैरासिटामोल को अभी भी गर्भावस्था के दौरान उपयोग की जाने वाली सबसे सुरक्षित दर्द निवारक दवा माना गया है।
- चिकित्सकीय परामर्श: हालांकि दवा सुरक्षित है, विशेषज्ञों का कहना है कि इसे केवल आवश्यकता होने पर और न्यूनतम प्रभावी खुराक में ही लिया जाना चाहिए।
- गलत सूचना पर लगाम: स्वास्थ्य विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रामक दावों का खंडन करें ताकि गर्भवती महिलाएं मानसिक तनाव से मुक्त रह सकें।
विज्ञान की अटूट मर्यादा
यह शोध उन लाखों परिवारों के लिए एक सुकून की लहर लेकर आया है जो अनजाने में गलत सूचनाओं का शिकार हो रहे थे। पैरासिटामोल को ऑटिज्म से जोड़ने वाले दावों का धराशायी होना यह साबित करता है कि चिकित्सा जगत में 'साक्ष्य-आधारित अध्ययन' ही अंतिम सत्य है। राजनीति और स्वास्थ्य जब टकराते हैं, तो अक्सर जनता का नुकसान होता है, लेकिन इस बार विज्ञान ने ढाल बनकर उस भरोसे को बहाल किया है जो आधुनिक चिकित्सा पद्धति की नींव है। अब समय आ गया है कि हम सुनी-सुनाई बातों के बजाय शोध और विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दें।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
