भारत का 'स्वास्थ्य संकल्प' सफल; देश के 50,000 से अधिक सरकारी अस्पतालों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन
भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रचा इतिहास! 50,373 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन। जिला अस्पतालों से लेकर आयुष्मान आरोग्य केंद्रों तक अब मरीजों को मिलेगी वर्ल्ड क्लास सुविधाएं। जानिए कैसे वर्चुअल असेसमेंट और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने बदली देश के सरकारी अस्पतालों की सूरत और क्या है सरकार का 2026 तक का अगला बड़ा लक्ष्य।

universal health coverage targets in India 2026 : आज़ादी के अमृत महोत्सव की पावन बेला में भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के मानचित्र पर एक ऐसी स्वर्णिम लकीर खींच दी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की गारंटी बनेगी। देश के स्वास्थ्य इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय जोड़ते हुए भारत ने 50,373 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को 'राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक' (NQAS) के तहत प्रमाणित करने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस मज़बूत इरादे का प्रमाण है जिसके तहत अब देश के सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्थित सरकारी अस्पताल भी निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों जैसी सुरक्षा, स्वच्छता और मरीज-केंद्रित देखभाल प्रदान करने के लिए विश्व स्तर पर मान्य हो चुके हैं।
इस सफर की दास्तां जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही विस्मयकारी भी। वर्ष 2015 में जब NQAS की नींव रखी गई थी, तब महज 10 जिला अस्पतालों से इस बदलाव की शुरुआत हुई थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इस विज़न का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में व्याप्त उस छवि को बदलना था, जहाँ उपचार तो मिलता था लेकिन गुणवत्ता और सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगे रहते थे। पिछले कुछ वर्षों में इस पहल का विस्तार जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक किया गया। विशेष रूप से दिसंबर 2023 के बाद इस अभियान ने जो रफ्तार पकड़ी, वह बेमिसाल है। वर्चुअल असेसमेंट की आधुनिक तकनीक और डिजिटल नवाचार के समावेश ने प्रमाणन की प्रक्रिया को ऐसी गति दी कि एक वर्ष के भीतर प्रमाणित संस्थानों की संख्या 22 हजार से बढ़कर 50 हजार के पार पहुँच गई।
कानूनी और नीतिगत दृष्टिकोण से देखें तो यह सफलता 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017' के उन लक्ष्यों के अनुरूप है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की वकालत करते हैं। इसमें 48,663 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 1,710 माध्यमिक स्तर के अस्पतालों का शामिल होना यह सुनिश्चित करता है कि प्राथमिक स्तर पर ही नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिलें, जिससे बड़े अस्पतालों पर बोझ कम हो सके। सरकार ने अब मार्च 2026 तक देश के कम से कम 50 प्रतिशत स्वास्थ्य संस्थानों को इस मानक के दायरे में लाने का एक और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह उपलब्धि न केवल 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना को सशक्त करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का नया मॉडल बनने की राह पर अग्रसर है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
