जेएसीसी की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 30 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित हैं, जिसे एम्स के डॉक्टरों ने साइलेंट एपिडेमिक घोषित किया है।

Hypertension crisis in India 2026 : भारत में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन अब एक ऐसी खामोश महामारी का रूप ले चुका है, जो देश की युवा आबादी को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। अब तक केवल बुजुर्गों और अधेड़ उम्र के लोगों की बीमारी मानी जाने वाली यह शारीरिक कड़वाहट अब देश के युवाओं को तेजी से अपना शिकार बना रही है। देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान दिल्ली एम्स (AIIMS) के शीर्ष कार्डियोलॉजिस्ट और विशेषज्ञों ने एक बेहद डरावनी स्थिति की ओर इशारा करते हुए देशव्यापी चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि अगर समय रहते इस बीमारी को लेकर देश में व्यापक जागरूकता, नियमित जांच और जीवनशैली में आमूलचूल बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले कुछ ही सालों में भारत हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी घातक बीमारियों का वैश्विक केंद्र बन सकता है। यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे भारत के भविष्य पर मंडराता एक अदृश्य आपातकाल मान रहे हैं।

चिकित्सा जगत की बेहद प्रतिष्ठित पत्रिका 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' (JACC) में प्रकाशित एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय भारत में लगभग 30 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इस आंकड़े का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि इन 30 करोड़ लोगों में से एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है, जिन्हें इस बात का अंदाजा तक नहीं है कि वे हाइपरटेंशन जैसी जानलेवा बीमारी के मरीज बन चुके हैं। लक्षणहीन होने के कारण चिकित्सा वैज्ञानिकों ने इसे "साइलेंट एपिडेमिक" का नाम दिया है, जिसके शुरुआती संकेत आम मरीजों को समझ में नहीं आते और वे सालों-साल बिना किसी चिकित्सकीय जांच के इस टाइम बम पर जीते रहते हैं। रिपोर्ट के क्षेत्रीय विश्लेषण से पता चलता है कि देश के ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण बहुत कम लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है, वहीं शहरी क्षेत्रों की स्थिति भी अत्यधिक तनाव और भागदौड़ के कारण पूरी तरह से निराशाजनक बनी हुई है। देश में करोड़ों लोग या तो इस बीमारी का निदान होने के बाद भी इलाज शुरू नहीं करते या फिर डॉक्टरों की सलाह के बिना बीच में ही दवाइयां खाना छोड़ देते हैं, जो सीधे तौर पर मौत को आमंत्रण देने जैसा है। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, यही घोर लापरवाही आगे चलकर अचानक होने वाले हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी फेलियर जैसी अत्यधिक गंभीर और जानलेवा चिकित्सा स्थितियों का मुख्य कारण बनती है।

भौगोलिक दृष्टि से देश की राजधानी दिल्ली और उसके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को लेकर इस रिपोर्ट में बेहद परेशान करने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। पिछले दो दशकों के डेटा का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर में हाई ब्लड प्रेशर के कुल मामलों में दो से तीन गुना तक की अकल्पनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस प्रादेशिक गिरावट के पीछे एम्स के विशेषज्ञ महानगरों की बेहद खराब और गतिहीन जीवनशैली, जंक फूड के जरिए शरीर में जाने वाला अत्यधिक नमक, कार्यस्थलों का मानसिक तनाव, पूरी नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों का शून्य हो जाना मानते हैं। युवाओं के संदर्भ में बात करें तो तेजी से बदलता कॉरपोरेट कल्चर, लगातार कई घंटों तक लैपटॉप और मोबाइल की स्क्रीन के सामने बैठे रहना, देर रात तक जागना और फिजिकल वर्कआउट से पूरी तरह दूरी बना लेना ही युवाओं की धमनियों में इस दबाव को बढ़ा रहा है। चिकित्सा अधिकारियों ने इस संकट से निपटने के लिए बेहद सख्त गाइडलाइंस साझा करते हुए हर महीने अनिवार्य ब्लड प्रेशर जांच, भोजन में सोडियम की मात्रा को आधा करने, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का शारीरिक व्यायाम करने और मानसिक तनाव को प्रबंधित करने की अत्यधिक आवश्यकता पर जोर दिया है।

इस पूरे स्वास्थ्य संकट के नीतिगत और चिकित्सा-कानूनी पहलुओं पर गौर करें तो भारत में हाई ब्लड प्रेशर का इलाज और इसकी दवाइयां अपेक्षाकृत रूप से बेहद सुलभ और सस्ती हैं, लेकिन देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की बुनियादी कमजोरियां इस संकट को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक आज भी हाइपरटेंशन की मानक दवाइयों की निरंतर उपलब्धता और अनिवार्य फॉलोअप प्रोटोकॉल की पहुंच बेहद सीमित है। स्वास्थ्य नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि इस राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए भारत सरकार को तुरंत बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्क्रीनिंग अभियान, ग्रामीण स्तर पर डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी का समावेश और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक बेहद सरल तथा सुलभ इलाज प्रोटोकॉल कानूनी रूप से लागू करना होगा।

इस गंभीर स्वास्थ्य बुलेटिन का निष्कर्ष यही है कि भारत इस समय एक बहुत बड़े जनसांख्यिकीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। यदि देश के नीति निर्माताओं, चिकित्सा संगठनों और आम नागरिकों ने मिलकर इस खामोश बीमारी के खिलाफ एक व्यापक और आक्रामक जन-जागरूकता आंदोलन नहीं छेड़ा, तो आने वाले समय में हृदय और मस्तिष्क संबंधी अपंगता का आर्थिक और सामाजिक बोझ पूरे देश की रीढ़ तोड़ देगा। एम्स के डॉक्टरों की यह अंतिम अपील हर भारतीय के लिए एक वेक-अप कॉल है कि वे हाई ब्लड प्रेशर को एक सामान्य या मामूली शारीरिक समस्या मानकर नजरअंदाज करने की भूल कतई न करें, क्योंकि सही समय पर की गई एक छोटी सी जांच ही इस साइलेंट किलर से जीवन की रक्षा का एकमात्र और सबसे अचूक हथियार है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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