Health Tips : आयुर्वेदा और योगसे कैसे रखे अपने शरीर, मन और ऊर्जा को संतुलित ? जाने विस्तार से
Health Tips : आयुर्वेद और योगशास्त्र के अनुसार मानव शरीर की ७२,००० नाडियाँ प्राणशक्ति के मार्ग हैं। प्राणायाम, सूर्यनमस्कार, तिल तेल मालिश और तटपाय शेक जैसे घरेलू उपाय इन नाडियों को सक्रिय रखते हैं, जिससे शरीर, मन और ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और थकान व तनाव कम होता है।

body mind spirit harmony techniques
body mind spirit harmony techniques : आयुर्वेद और योगशास्त्र के अनुसार मानव शरीर में लगभग ७२,००० नाडियाँ होती हैं, जो प्रत्यक्ष नसों की तुलना में प्राणशक्ति के संचरण के मार्ग हैं। यदि ये नाडियाँ शुद्ध और सक्रिय रहें, तो न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा का संतुलन भी बना रहता है। वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि नाडियों की सक्रियता स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता और ऊर्जा प्रवाह के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नाडियों को सक्रिय रखने के लिए प्राचीन भारतीय परंपरा में कई घरेलू और प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। प्राणायाम, विशेषकर अनुलोम-विलोम अभ्यास, नाडियों को शुद्ध करता है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है। प्रतिदिन १५–२० मिनट का प्राणायाम नाडियों की कार्यक्षमता बनाए रखने में सहायक माना जाता है। सूर्यनमस्कार का अभ्यास भी संपूर्ण नाड़ी तंत्र को जागृत रखता है और सभी स्नायु तथा संधियों को सक्रिय बनाए रखता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से रात में गर्म दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीना नाडियों, मज्जा तंत्र और मस्तिष्क के लिए पोषणकारी होता है। तिल के तेल से शरीर और सिर की मालिश करने से रक्त संचार सुधरता है और नाडियों में अवरोध कम होते हैं। पर्याप्त गहरी नींद, सात से आठ घंटे, नाडियों के पुनर्बलन और प्राणशक्ति के संतुलन के लिए अनिवार्य है। आहार में ताजे फल, हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज और सूखे मेवे शामिल करना चाहिए, जबकि अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज करना लाभकारी है।
ध्यान और मंत्र जप, जैसे "ॐ" का उच्चारण, नाडियों में प्राणशक्ति के प्रवाह को संतुलित करता है। इसके अलावा, ७२,००० नाडियों को सक्रिय रखने के लिए तटपाय शेक एक प्रभावी उपाय है। इसमें गुनगुते पानी में कपूर की पत्तियाँ, नींबू का रस, सेंधा नमक और हल्दी मिलाकर पांव को १५–२० मिनट तक डुबोकर रखना चाहिए। इसके बाद तिल या नारियल तेल से हल्की मालिश करने से पांव के मर्मबिंदु सक्रिय होते हैं, रक्त संचार सुधरता है, थकान और दर्द कम होते हैं, मज्जा तंत्र मजबूत होता है और मानसिक तनाव घटता है।
इस प्रयोग को सप्ताह में २–३ बार नियमित रूप से करना नाडियों में प्राणशक्ति के प्रवाह को बढ़ाता है और शरीर-संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। आयुर्वेद और योग द्वारा सुझाए गए ये उपाय आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
