Health News : देश के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, और चिकित्सकों की चेतावनी साफ है – यह हवा अब सिर्फ फेफड़ों को नहीं, सीधे हृदय पर हमला कर रही है। सर्दियों का आगमन प्रदूषण के लिए सबसे उपजाऊ मौसम साबित होता है। ठंडी हवा में प्रदूषित कण नीचे जम जाते हैं, हवा का प्रवाह रुक जाता है और स्मॉग की मोटी चादर सूरज की किरणों को भी रोक देती है। परिणामस्वरूप, पीएम2.5 और पीएम10 जैसे अति सूक्ष्म कण फेफड़ों से होते हुए सीधे रक्त प्रवाह में पहुंच जाते हैं। ये कण रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परत को क्षतिग्रस्त करते हैं, सूजन बढ़ाते हैं, नसें सिकुड़ने लगती हैं और खून का प्रवाह बाधित हो जाता है। लगातार ऐसी हवा में सांस लेने से हृदय गति अनियमित होती है, रक्तचाप बढ़ता है, ऑक्सीजन की कमी होती है और शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जो हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करने लगता है।


राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि प्रदूषण के कारण रक्त वाहिकाओं में थक्के बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। प्लेटलेट्स अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं और कभी भी अचानक ब्लॉकेज की स्थिति बन सकती है, जो हार्ट अटैक का सीधा कारण बनती है। पहले से हृदय रोग, मधुमेह, अस्थमा या उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डॉ. जैन के अनुसार, स्मॉग के दिनों में हार्ट अटैक के केस में स्पष्ट वृद्धि देखी जा रही है। छाती में दर्द या भारीपन, अचानक सांस फूलना, बेचैनी, कंधे या बांह में दर्द, चक्कर आना और असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।


प्रदूषण से हृदय की रक्षा के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे दिनों में बाहर निकलते समय अनिवार्य रूप से एन95 मास्क का उपयोग करें। सुबह और शाम के समय स्मॉग सबसे घना होता है, इसलिए उस वक्त व्यायाम या टहलने से बचें। घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त पानी पीएं, फल-सब्जियों और फाइबर युक्त आहार लें, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह परहेज करें तथा रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें।


जैसे-जैसे शहरों की हवा जहरीली होती जा रही है, वैसे-वैसे हार्ट अटैक का खतरा युवाओं तक पहुंचता जा रहा है। यह अब सिर्फ एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिसे नजरअंदाज करना लाखों जिंदगियों को जोखिम में डाल सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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