विदेश से लौटे यात्री रहें सावधान; इबोला पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया बड़ा अलर्ट
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए जारी किए दिशानिर्देश; संदिग्ध लक्षण दिखने पर हेल्पलाइन नंबर 1075 पर संपर्क करने की अपील।

नीले दस्ताने पहने हुए एक स्वास्थ्य कर्मी के हाथ में इबोลา वायरस टेस्ट ट्यूब सैंपल, जो देश भर के चिकित्सा संस्थानों और हवाई अड्डों पर सतर्कता बढ़ाने के संदर्भ को दर्शाता है।
Ebola virus update India : दुनिया के कई हिस्सों में कहर बरपाने वाले खतरनाक इबोला वायरस को लेकर भारत सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस घातक बीमारी के संभावित खतरे से देश को सुरक्षित रखने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक एडवाइजरी जारी की है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वर्तमान समय तक पूरे भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर बढ़ती आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के विस्तार को देखते हुए सरकार किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर नागरिकों, विशेषकर विदेश से लौटने वाले यात्रियों के लिए कड़े स्वास्थ्य दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि देश की सीमाओं के भीतर इस संक्रामक वायरस के प्रवेश को पूरी तरह से रोका जा सके।
मंत्रालय द्वारा आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई विस्तृत जानकारी के अनुसार, सुरक्षा का यह घेरा मुख्य रूप से उन यात्रियों के लिए तैयार किया गया है जो हाल ही में विदेश यात्रा से लौटे हैं। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति पिछले इक्कीस दिनों के भीतर इबोला वायरस से प्रभावित किसी देश की यात्रा करके लौटा है या वहां से होकर भारत पहुंचा है, तो उसे अपनी सेहत को लेकर अत्यधिक गंभीर रहने की आवश्यकता है। यात्रा अवधि के भीतर या भारत लौटने के बाद यदि किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, उल्टी, दस्त अथवा बिना किसी स्पष्ट कारण के शरीर से रक्तस्राव जैसे संदिग्ध लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे बिना एक पल गंवाए सबसे पहले खुद को दूसरों से पूरी तरह अलग यानी आइसोलेट कर लेना चाहिए। इसके तुरंत बाद स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को अपनी स्थिति और यात्रा इतिहास की पूरी जानकारी साझा करनी होगी, ताकि समय रहते चिकित्सा दल आवश्यक जांच और उपचार की पुख्ता व्यवस्था कर सके।
इस बीमारी की संक्रामक और जानलेवा प्रकृति को देखते हुए सरकारी स्वास्थ्य तंत्र ने शुरुआती स्तर पर ही इसकी पहचान करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। अधिकारियों ने आम जनता से भावुक अपील की है कि वे शरीर में दिखने वाले किसी भी छोटे या संदिग्ध लक्षण को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर नजरअंदाज करने की भूल कतई न करें। शुरुआती चरण में ही बीमारी की सूचना देने से न केवल मरीज को त्वरित और सही इलाज मिलना संभव हो जाता है, बल्कि समाज में संक्रमण के संभावित फैलाव की कड़ियों को भी समय रहते तोड़ा जा सकता है। आपातकालीन स्थिति से निपटने और नागरिकों को चौबीसों घंटे प्रामाणिक चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने अपनी राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवा को भी पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है। देश का कोई भी नागरिक इबोला से जुड़ी किसी भी सटीक जानकारी, शंका समाधान या आपातकालीन सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1075 पर दिन या रात के किसी भी समय संपर्क स्थापित कर सकता है।
चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से इबोला वायरस को बेहद गंभीर और कई मामलों में शत-प्रतिशत जानलेवा संक्रामक बीमारी की श्रेणी में रखा गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस हवा से नहीं बल्कि मुख्य रूप से किसी संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे रक्त, पसीना, लार या अन्य शारीरिक स्राव के सीधे संपर्क में आने से एक इंसान से दूसरे इंसान में तेजी से फैलता है। इसकी शुरुआत भले ही सामान्य फ्लू या हल्के बुखार जैसी लगती हो, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर यह मरीज के आंतरिक और बाहरी अंगों से होने वाले अनियंत्रित रक्तस्राव का रूप ले लेती है, जिससे स्थिति अत्यंत नाजुक हो जाती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर कड़ी निगरानी को देश की सुरक्षा के लिए सबसे अचूक हथियार मान रहे हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर उड़ानों के बढ़ते दायरे के कारण ऐसे वायरसों का एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचना बेहद आसान हो गया है।
इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम के बीच भारत सरकार स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और देश के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों पर निगरानी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशवासियों से पुरजोर अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों और डराने वाले संदेशों पर बिल्कुल ध्यान न दें, बल्कि केवल सरकारी और आधिकारिक मंचों से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें। यह पूरी कवायद यह साबित करती है कि आने वाले समय में सामूहिक जागरूकता, व्यक्तिगत सतर्कता और लक्षणों की त्वरित रिपोर्टिंग ही भारत को इस वैश्विक महामारी के साए से पूरी तरह सुरक्षित रखने में सबसे बड़ी ढाल साबित होने वाली है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
