कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का नया प्रकोप तेजी से फैल रहा है। WHO ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। 900 से अधिक संदिग्ध मामलों और बढ़ती मौतों के बीच कांगो सरकार ने आपातकालीन अभियान शुरू किया है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।

अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में इबोला वायरस के नए प्रकोप ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न” यानी PHEIC घोषित कर दिया है। हालांकि WHO ने अभी इसे वैश्विक महामारी घोषित नहीं किया है, लेकिन तेजी से बढ़ते मामलों, सीमापार संक्रमण और संघर्षग्रस्त इलाकों में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।

इस बार इबोला का जो स्वरूप सामने आया है, वह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल न तो कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध है और न ही कोई विशेष एंटीवायरल उपचार। यही वजह है कि संक्रमण के बढ़ते आंकड़े और मौतों की खबरें स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।

24 मई 2026 तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 904 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 101 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। वहीं 119 संदिग्ध मौतों की जानकारी सामने आई है, जबकि 10 मौतों की पुष्टि इबोला संक्रमण से हुई है। दूसरी ओर युगांडा में भी संक्रमण ने दस्तक दे दी है, जहां 5 मामलों की पुष्टि हुई है और एक संक्रमित व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

WHO की पहले जारी रिपोर्ट के अनुसार 21 मई तक डीआरसी में 746 संदिग्ध मामले और 176 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई थीं। संक्रमण अब इटुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु जैसे संवेदनशील इलाकों तक फैल चुका है। ये क्षेत्र लंबे समय से हिंसा, विद्रोही गतिविधियों और कमजोर स्वास्थ्य ढांचे की समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे राहत और चिकित्सा अभियान प्रभावित हो रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति इसलिए बेहद गंभीर मानी जा रही है क्योंकि संक्रमण तेजी से फैल रहा है, सीमाओं को पार कर चुका है और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग चरमराई हुई हैं। संघर्ष प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को काम करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर स्थानीय लोगों का अविश्वास भी स्वास्थ्य अभियानों के लिए बड़ी बाधा बन रहा है।

हालात को नियंत्रण में लाने के लिए कांगो सरकार ने WHO, यूनिसेफ, रेड क्रॉस और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आपातकालीन अभियान शुरू किया है। इटुरी प्रांत में 1600 से अधिक लोगों की पहचान संभावित संपर्कों के रूप में की गई है, जिनकी लगातार निगरानी की जा रही है। संक्रमित मरीजों को अलग रखने के लिए बुनिया, मोंगब्वालु और रवामपारा में विशेष इबोला उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं।

सीमापार संक्रमण को रोकने के लिए कांगो और युगांडा दोनों देशों ने सीमा जांच, एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और यात्रियों की निगरानी को और सख्त कर दिया है। इसके साथ ही संक्रमित शवों से संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए अनधिकृत अंतिम संस्कारों पर प्रतिबंध लगाया गया है और हाई-रिस्क क्षेत्रों में बड़े सार्वजनिक आयोजनों को सीमित करने की सलाह दी गई है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांगो और युगांडा ने संयुक्त रूप से लगभग 320 मिलियन डॉलर की अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग की है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने भी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और राहत कार्यों के लिए करीब 50 मिलियन डॉलर की सहायता देने का आश्वासन दिया है।

हालांकि राहत कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंसा और अस्थिरता बनी हुई है। पूर्वी कांगो के कई इलाकों में अस्पतालों और राहत शिविरों पर हमले हुए हैं। कुछ स्थानों पर गुस्साई भीड़ ने इबोला केंद्रों पर हमला कर दिया, जबकि एक मेडिकल टेंट को आग के हवाले कर दिया गया। स्वास्थ्यकर्मियों और राहत एजेंसियों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जा रही है।

WHO के अनुसार प्रभावित इलाकों में जोखिम स्तर “बहुत अधिक” है, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर भी खतरा उच्च बना हुआ है। हालांकि फिलहाल वैश्विक स्तर पर जोखिम कम बताया गया है, लेकिन संक्रमण की गति और मौजूदा हालात ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह प्रकोप आने वाले समय में और बड़े संकट का रूप ले सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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