डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ा, डब्ल्यूएचओ ने शुरू की वित्तीय तैयारी।

Ebola Outbreak Congo 2026 : अफ्रीकी महाद्वीप एक बार फिर दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा वायरस 'इबोला' के शिकंजे में कसता जा रहा है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) से आ रही डराने वाली रिपोर्टों ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की नींद उड़ा दी है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में इबोला वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या तेजी से बढ़कर 452 हो गई है, जबकि इस घातक संक्रमण के कारण अब तक 82 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की यह रफ्तार आने वाले दिनों में एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले सकती है, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

कांगो के इतुरी और नॉर्थ किवु प्रांत इस समय इस जानलेवा बीमारी के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। बीते 4 जून को स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन दोनों प्रांतों में रिकॉर्ड 71 नए पुष्ट मामलों की पुष्टि की थी, जिनमें से अकेले उसी दिन 21 लोगों की मौत हो गई। इस प्रकोप के पीछे इबोला का बेहद आक्रामक 'बुंडिबुग्यो स्ट्रेन' जिम्मेदार माना जा रहा है, जो कम्युनिटी ट्रांसमिशन (सामुदायिक प्रसार) के जरिए बेहद तेजी और निरंतरता के साथ लोगों को अपना शिकार बना रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में कुल 258 मरीज विभिन्न अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जबकि महज आठ लोग ही अब तक पूरी तरह ठीक हो सके हैं। इस संकट ने फ्रंटलाइन पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जहां अब तक 34 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से सात की मौत हो चुकी है और केवल छह ही ठीक हो पाए हैं।

इस महामारी से निपटने में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक और जमीनी स्तर पर आ रही गंभीर चुनौतियां हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि संक्रमण को रोकने के लिए की जाने वाली 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' (संपर्क में आए लोगों की तलाश) में भारी लापरवाही और विफलता सामने आई है। निगरानी के लिए तय किए गए 4,766 संदिग्धों में से स्वास्थ्य विभाग केवल 2,755 लोगों तक ही पहुंच पाया है, जो कि महज 57.8 प्रतिशत की फॉलो-अप दर है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर पोस्टमार्टम के दौरान स्वैब टेस्ट का भारी विरोध किया जा रहा है। अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी जीवन रक्षक दवाओं का अकाल पड़ा हुआ है। नॉर्थ किवु जैसे संवेदनशील इलाकों में संक्रमण से बचाव के पीपीई किट और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध नहीं हैं। इस पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कांगो सरकार के पास तात्कालिक रूप से 21.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम फंड की कमी बनी हुई है।

इस महामारी की तपिश अब कांगो की सीमाओं को लांघकर पड़ोसी मुल्कों तक भी पहुंच चुकी है। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि देश में इबोला के तीन नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद वहां कुल संक्रमितों की संख्या 19 हो गई है। सीमा पार होते इस संक्रमण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खतरे की घंटी बजा दी है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज Control एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने संयुक्त रूप से पूरे महाद्वीप के लिए एक व्यापक रेस्क्यू और प्रिवेंशन प्लान तैयार किया है। वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं ने जून से नवंबर के बीच अफ्रीकी देशों को इस महामारी से बचाने, तेजी से मामलों की पहचान करने और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 518 मिलियन अमेरिकी डॉलर का फंड जुटाने की मुहिम शुरू कर दी है।

डब्ल्यूएचओ और अफ्रीका सीडीसी की रिपोर्टों ने यह साफ कर दिया है कि कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा, युद्ध जनित विस्थापन, लोगों की अनियंत्रित आवाजाही और इस वायरस के प्रति स्थानीय आबादी में फैला अविश्वास व गलत जानकारियां इस लड़ाई को और अधिक जटिल बना रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते इस वित्तीय और चिकित्सीय कमी को पूरा नहीं किया, तो बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का यह अनियंत्रित प्रसार अफ्रीकी महाद्वीप से निकलकर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक ऐसा "परफेक्ट स्टॉर्म" बन सकता है, जिसे संभालना दुनिया के किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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