'e-Sanjeevani' बनी भारत की लाइफलाइन; घर बैठे मिल रहा है देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों का परामर्श
ई-संजीवनी: भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में रचा इतिहास। घर बैठे मुफ्त डॉक्टर परामर्श और ABDM एकीकरण के साथ अब इलाज हुआ और भी आसान।

e-Sanjeevani Yojana
eSanjeevani Telemedicine India : भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अभूतपूर्व डिजिटल परिवर्तन की लहर चल रही है, जिसने न केवल शहरों और गांवों के बीच की भौगोलिक दूरी को मिटा दिया है, बल्कि चिकित्सा परामर्श को हर नागरिक की मुट्ठी में ला खड़ा किया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा, 'ई-संजीवनी', आज दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली टेलीमेडिसिन प्रणाली के रूप में उभरकर सामने आई है। सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवाओं के इस अनूठे संगम ने देश के करोड़ों लोगों के लिए 'अस्पताल' की परिभाषा को ही बदल दिया है।
संकट से समाधान तक का सफर :
ई-संजीवनी की संकल्पना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में की गई थी, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाई दी। जब पूरा देश लॉकडाउन की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब ई-संजीवनी ने एक 'डिजिटल हाईवे' के रूप में कार्य किया, जिससे मरीजों को संक्रमण के जोखिम के बिना विशेषज्ञों की सलाह मिल सकी। सी-डैक, मोहाली द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित यह प्लेटफॉर्म अब तक 34 करोड़ से अधिक रोगियों को अपनी सेवाएँ प्रदान कर चुका है। आज यह सेवा एक दिन में 10 लाख रोगियों को संभालने की क्षमता के साथ भारत की स्वास्थ्य वितरण प्रणाली की एक समानांतर और सशक्त धारा बन चुकी है।
दोहरे मॉडल से सुदृढ़ होती स्वास्थ्य व्यवस्था :
ई-संजीवनी की सफलता का रहस्य इसके दो विशिष्ट कार्यात्मक मॉडलों में छिपा है, जो समाज के हर वर्ग की जरूरतों को पूरा करते हैं:
- ई-संजीवनी आयुष्मान भारत-HWC (प्रदाता से प्रदाता) : यह 'हब एंड स्पोक' मॉडल पर आधारित है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (स्पोक) को जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों (हब) के विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ा जाता है। इससे सुदूर गांवों में बैठा मरीज भी शहर के बड़े विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त कर पा रहा है।
- ई-संजीवनी ओपीडी (मरीज से डॉक्टर) : यह सेवा सीधे नागरिक के स्मार्टफोन या कंप्यूटर से संचालित होती है। इसके माध्यम से मरीज घर बैठे वीडियो कॉल पर डॉक्टर से बात कर सकता है, जो वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हुई है।
एकीकरण और तकनीक का समावेश :
इस डिजिटल ढांचे को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के साथ एकीकृत कर दिया है। अब ई-संजीवनी के उपयोगकर्ता अपना 14 अंकों का विशिष्ट 'आभा' (ABHA - आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) बना सकते हैं। इससे मरीजों के नुस्खे, लैब रिपोर्ट और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहते हैं और उन्हें डॉक्टरों के साथ साझा करना पूरी तरह से कागज रहित (Paperless) हो गया है। तकनीक के स्तर पर, यह प्लेटफॉर्म क्लाउड-आधारित अत्याधुनिक सेवाओं का उपयोग करता है, जिससे इंटरनेट की उपलब्धता ही इसकी एकमात्र शर्त रह जाती है।
सम्मान और सामाजिक प्रभाव :
ई-संजीवनी ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण किया है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर 'डिजिटल ग्लोबल गुड' के रूप में मान्यता मिली है। इसकी उत्कृष्टता के लिए इसे 'डिजिटल इंडिया अवार्ड 2020' (प्लैटिनम श्रेणी) में भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है। जेलों के कैदियों से लेकर देश के अलग-थलग हिस्सों में रहने वाले नागरिकों तक, यह सेवा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच का विस्तार कर रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
