गर्भावस्था हर महिला के लिए एक खास और संवेदनशील समय होता है। इस दौरान महिलाओं के मन में कई सवाल उठते हैं, जिनमें से एक बड़ा सवाल है – क्या प्रेग्नेंसी में फिजिकल रिलेशन बनाना सुरक्षित है और क्या इससे नॉर्मल डिलीवरी आसान हो जाती है? इस सवाल का जवाब पूरी तरह महिला की सेहत, गर्भावस्था की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रूचिका शर्मा बताती हैं कि अगर प्रेग्नेंसी सामान्य है और कोई जटिलता नहीं है, तो प्रेग्नेंसी में फिजिकल रिलेशन करना हानिकारक नहीं माना जाता। यह न केवल पति-पत्नी के बीच इमोशनल कनेक्शन को मजबूत करता है, बल्कि कई बार शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करने में भी मदद करता है।


कैसे मदद करता है नॉर्मल डिलीवरी में ?


  1. पेल्विक मसल्स मजबूत होना : हल्के और सुरक्षित शारीरिक संबंध पेल्विक मसल्स को एक्टिव रखते हैं। मजबूत मसल्स लेबर के समय डिलीवरी को आसान बना सकती हैं।
  2. ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्राव : संबंध बनाने और ऑर्गैज्म के दौरान ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, जिसे ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है। यह गर्भाशय को रिलैक्स करता है और लेबर को नैचुरल तरीके से शुरू करने में मददगार हो सकता है।
  3. तनाव कम करना : गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेस कम करना बेहद जरूरी है। प्रेग्नेंसी में फिजिकल रिलेशन करने से मानसिक सुकून मिलता है और महिला को डिलीवरी के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।



किन महिलाओं को बचना चाहिए ?

  1. जिन महिलाओं को प्रीमैच्योर लेबर का खतरा है।
  2. जिनके पास प्लेसेंटा प्रीविया या बार-बार ब्लीडिंग की समस्या है।
  3. जिनकी डॉक्टर ने मेडिकल जटिलताओं की वजह से संबंध बनाने की मनाही की है।
  4. डॉ. शर्मा का कहना है, “अगर प्रेग्नेंसी हाई रिस्क नहीं है, तो फिजिकल रिलेशन सुरक्षित हो सकता है, लेकिन हर महिला को अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।”



कैसे रखें फिजिकल रिलेशन सुरक्षित ?


  1. हमेशा आरामदायक और सुरक्षित पोजीशन चुनें।
  2. किसी भी तरह के दबाव या रफ व्यवहार से बचें।
  3. स्वच्छता और हेल्दी वातावरण बनाए रखें।


अगर ब्लीडिंग, दर्द या असामान्य डिस्चार्ज हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। प्रेग्नेंसी में फिजिकल रिलेशन नॉर्मल डिलीवरी को आसान बनाने में मददगार हो सकता है, लेकिन यह केवल सुरक्षित और सामान्य गर्भावस्था में ही संभव है। हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना जरूरी है। यह न केवल शारीरिक बल्कि भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है, जिससे गर्भावस्था का अनुभव और बेहतर हो जाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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