नई दिल्ली/चंडीगढ़: उत्तर भारत के विशाल भूभाग पर कुदरत का कहर बनकर टूट रही ठंड ने अब जानलेवा रूप अख्तियार कर लिया है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं और आसमान से गिरती ओस की बूंदों ने न केवल पारा गिराया है, बल्कि जनजीवन को पूरी तरह ठिठुरा कर रख दिया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में सुबह की पहली किरण के साथ दिखने वाला घना कोहरा अब केवल यातायात के लिए बाधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और चेतावनी के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने अब इसे लेकर 'हेल्थ एडवाइजरी' जारी कर दी है, जिसमें विशेष रूप से समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—बुजुर्गों और बच्चों—को घरों में रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

क्षेत्रीय परिस्थितियों का जायजा लेते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे एक अदृश्य स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया है। फिरोजपुर के सिविल सर्जन डॉ. राजीव पराशर ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भीषण ठंड के संपर्क में आने से न केवल सामान्य सर्दी-जुकाम, बल्कि हाइपोथर्मिया (शरीर के तापमान का खतरनाक स्तर तक गिरना), अत्यधिक कंपकंपी, याददाश्त कम होना और यहां तक कि बेहोशी जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। मौसम के इस बदलते मिजाज के बीच अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों की संख्या में 20 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है, जिनमें सांस लेने में तकलीफ और निमोनिया से ग्रस्त बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।

प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता चरम पर है। रोहतक के उपायुक्त सचिन गुप्ता ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी से लगातार अपडेट रहें और बिना जरूरी काम के बाहर न निकलें। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि बंद कमरों में कोयले की अंगीठी या हीटर का प्रयोग करते समय वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड का बढ़ता स्तर जानलेवा साबित हो सकता है। इसी कड़ी में धौलपुर के जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी टी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें बताया गया है कि ठंड के कारण धमनियों के सिकुड़ने से दिल के दौरों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

कानूनी और आधिकारिक प्रावधानों के तहत, उत्तर प्रदेश के वाराणसी और नोएडा जैसे शहरों में ठंड और कम दृश्यता को देखते हुए कक्षा 8 तक के स्कूलों को 10 जनवरी 2026 तक बंद रखने के आदेश पहले ही लागू किए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश के बैतूल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने रैन बसेरों में रह रहे लोगों की स्वास्थ्य जांच के लिए मेडिकल टीमें तैनात कर दी हैं। वहीं लुधियाना की सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर ने सलाह दी है कि इस मौसम में विटामिन-सी युक्त आहार और ताजे गर्म भोजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

स्वास्थ्य विभाग की इस सामूहिक चेतावनी और अधिकारियों की सक्रियता के बीच यह स्पष्ट है कि आगामी कुछ दिन उत्तर भारत के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। जिला मास मीडिया अधिकारी संजीव शर्मा, और डिप्टी मास मीडिया अधिकारी अंकुश भंडारी व नेहा भंडारी ने भी जनता से आग्रह किया है कि सर्दी या बुखार के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी सरकारी केंद्र पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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