देश में मोटापे (ओबेसिटी) और मेटाबॉलिक रोगों से निपटने के लिए अब पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों को साथ लेकर चलने की दिशा में एक ठोस पहल हुई है। Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) एवं Central Ayurveda Research Institute Bengaluru (CARI Bengaluru) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इस क्रम की शुरुआत मानी जा रही है। स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया के मार्गदर्शन में यह सम्मेलन भारत में “एविडेंस‑बेस्ड” इंटीग्रेटेड एप्रोच को जोड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता की मिसाल बनेगा।


CARI Bengaluru परिसर में आयोजित यह सम्मेलन जिसका शीर्षक है “आयुर्वेद एवं इंटीग्रेटेड दृष्टिकोण: मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम” प्रमुख विद्वानों, आयुर्वेदाचार्यों, मेडिसिन विशेषज्ञों और पब्लिक हेल्थ नीति निर्माताओं को एक साथ लाएगा। सम्मेलन में विभिन्न सत्र होंगे, जिनमें पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों को आधुनिक वैज्ञानिक शोध जैसे कि पोषण, व्यायाम, लाइफस्टाइल मैनेजमेंट, एवं आधुनिक मेडिसिन के साथ जोड़कर मोटापा व उससे संबद्ध रोगों का समग्र समाधान तलाशने पर चर्चा होगी।


यह सम्मेलन राज्य और केंद्र सरकार दोनों के स्वास्थ्य एजेंसियों तथा प्राइवेट स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को जोड़ने का मंच बनेगा। इस इंटीग्रेशन के मकसद से, जहां पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों की संवेदना और व्यापकता है, वहीं आधुनिक मेडिकल रिसर्च की प्रमाणिकता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण को भी समान महत्व दिया जाएगा।


स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह पहल सरकार की नीति के अनुरूप है, जिसमें वृहद स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करना प्राथमिकता है। मोटापे तथा मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग में बढ़ोतरी को देखते हुए, इन बीमारियों का व्यापक असर सिर्फ व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी पड़ता है।


इस सम्मेलन की रिपोर्ट और सुझावों को आधार बना कर, भविष्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों में संशोधन, आयुर्वेद व आधुनिक मेडिसिन दोनों को शामिल करते हुए एक समन्वित हेल्थ प्रोटोकॉल विकसित करने की योजना है। यदि यह सफल हुआ, तो भारत में हेल्थकेयर का तरीका ही बदल जाएगा यानी सिर्फ लक्षणों का इलाज नहीं, बल्कि जीवन‑शैली, पोषण, और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की समेकित पहल से जनता में स्वास्थ्य‑सचेतना बढ़ेगी। पारंपरिक जानी–पहचानी आयुर्वेदिक विधियों के प्रति लोगों का विश्वास रहेगा, और साथ ही आधुनिक शोध व प्रमाण‑आधारित दवाओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी। परिणामस्वरूप, मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियों की रोकथाम, उनका प्रबंधन, और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।


Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story