मेडिकल जगत में हुई AI से क्रांति; अब हार्ट अटैक आने से पहले मिलेगी चेतावनी, जाने कैसे?
AI की मदद से हार्ट फेल्योर का समय रहते चलेगा पता। वैज्ञानिकों ने विकसित किया नया एआई मॉडल जो अल्ट्रासाउंड डेटा से पहचानेगा हाई-रिस्क मरीज। जानें पूरी रिसर्च।

हृदय रोग और एआई तकनीक के संगम को दर्शाता एक प्रतीकात्मक चित्र।
AI in heart failure detection 2026 : चिकित्सा विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक के संगम ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। हृदय रोगों के खिलाफ जारी वैश्विक जंग में वैज्ञानिकों को एक ऐसी सफलता हाथ लगी है, जो मौत के करीब पहुंच चुके मरीजों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब तक जिसे पहचान पाना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती माना जाता था, उस 'एडवांस्ड हार्ट फेल्योर' को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से समय रहते डिटेक्ट किया जा सकेगा। वील कॉर्नेल मेडिसिन और न्यूयॉर्क-प्रेस्बिटेरियन के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह नई तकनीक न केवल बीमारी की गंभीरता को मापेगी, बल्कि उन मरीजों की भी पहचान करेगी जिन्हें तत्काल गहन उपचार की आवश्यकता है।
हार्ट फेल्योर एक ऐसी गंभीर स्थिति है जहां दिल शरीर की जरूरतों के मुताबिक खून को पंप करने में असमर्थ हो जाता है। वर्तमान में इसकी गंभीरता को मापने के लिए 'कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्टिंग' (CPET) का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी जटिल है। इसके लिए बेहद महंगे उपकरणों और विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है, जो अमूमन केवल बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में ही उपलब्ध होते हैं। संसाधनों की इस कमी के कारण लाखों मरीज समय पर सही जांच और इलाज से वंचित रह जाते हैं, जिससे यह बीमारी जानलेवा स्तर तक पहुंच जाती है। इसी कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने एआई का सहारा लिया है।
जर्नल 'एनपीजे डिजिटल मेडिसिन' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा परिष्कृत एआई मॉडल तैयार किया है जो मरीज की सामान्य 'इकोकार्डियोग्राफी' (दिल का अल्ट्रासाउंड) और मेडिकल रिकॉर्ड्स का गहन विश्लेषण करता है। यह सिस्टम अल्ट्रासाउंड वीडियो, ब्लड फ्लो की गति और हार्ट वॉल्व की गतिविधियों का सूक्ष्म अध्ययन करके 'पीक VO2' जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का अनुमान लगा लेता है। लगभग 1,000 मरीजों के डेटा पर प्रशिक्षित होने के बाद जब इसका परीक्षण 127 नए मरीजों पर किया गया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे। इस एआई मॉडल ने 85 प्रतिशत की सटीकता के साथ उन हाई-रिस्क मरीजों को ढूंढ निकाला, जिनका बचना पहले मुश्किल माना जा रहा था।
इस शोध का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि इसमें किसी नए या महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं है; यह उन्हीं डेटा पॉइंट्स का उपयोग करता है जो नियमित मेडिकल चेकअप के दौरान पहले से मौजूद होते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि इस तकनीक को क्लिनिकल स्तर पर लागू करने से पहले अभी व्यापक परीक्षणों और सुरक्षा मानकों की पुष्टि होना शेष है। यह नवाचार न केवल ग्रामीण और छोटे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाएगा, बल्कि आने वाले समय में हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु दर को कम करने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा। चिकित्सा जगत में आई यह डिजिटल क्रांति इस बात का प्रमाण है कि भविष्य में तकनीक और मानव कौशल मिलकर असाध्य बीमारियों को भी मात देने में सक्षम होंगे।
(यह जानकारी विभिन्न शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न समझें। किसी भी नए व्यायाम या गतिविधि को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श करें।)

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
