हनुमानगढ़, 8 नवम्बर। भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर हनुमानगढ़ में उत्सव का माहौल दिखाई दिया। शनिवार को भगतसिंह चौक से अंडरपास होते हुए सर्किट हाउस और अग्रसेन भवन तक आयोजित पदयात्रा में हजारों विद्यार्थियों, स्काउट-एनसीसी कैडेट्स, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन ने हाथों में तिरंगा थामकर वंदे मातरम के उद्घोष के साथ राष्ट्रभक्ति का उत्सव मनाया।

पदयात्रा की समाप्ति पर अग्रसेन भवन में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसका शुभारंभ दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत गायन के साथ किया गया। इस अवसर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पीएम श्री राजकीय विद्यालय, एनपीएस स्कूल और नवज्योति विकलांग संस्थान के विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियाँ दीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग मंत्री तथा जिला प्रभारी मंत्री श्री सुमित गोदारा ने कहा कि वंदे मातरम की रचना के समय शायद यह कल्पना नहीं की गई होगी कि यह गीत भारत की राष्ट्रीय पहचान और विश्वव्यापी प्रतीक बन जाएगा। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया, जिसे देश सदा सम्मानित रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल और बंकिमचंद्र चटर्जी की स्मृतियाँ हमारी राष्ट्रीय चेतना में सदैव अमर रहेंगी।

श्री प्रमोद डेलू ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए प्रत्येक देशवासी में राष्ट्रभक्ति की भावना होना आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे आयोजनों की परिकल्पना करके इस दिशा में मार्गदर्शन किया है। कार्यक्रम का संचालन श्री भीष्म कौशिक ने किया।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री हरि शंकर, जींद विधायक श्री कृष्ण मिड्ढा, पूर्व विधायक श्री गुरदीप शाहपिनी, पूर्व विधायक श्री धर्मेंद्र मोची, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रमोद डेलू, जनप्रतिनिधि श्री अमित चौधरी, एससी मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल, एडीएम श्री उम्मेदीलाल मीना, जिला परिषद सीईओ श्री ओ.पी. बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में स्काउट्स, एनसीसी कैडेट्स, स्कूली विद्यार्थी और आमजन उपस्थित रहे।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

बंकिमचंद्र चटर्जी ने 7 नवम्बर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर वंदे मातरम की रचना की थी। यह गीत उनके उपन्यास आनंदमठ के एक अंश के रूप में साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का चित्रण करते हुए यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया। आज, 150 वर्ष बाद भी वंदे मातरम युवाओं और आमजन में देशभक्ति की भावना जगाने का कार्य करता है।

इस कार्यक्रम ने न केवल वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया, बल्कि राष्ट्रभक्ति और एकता के महत्व को भी जीवंत किया। यह आयोजन हनुमानगढ़ में राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन गया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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