नोहर, 6 दिसंबर। संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 70वीं महापरिनिर्वाण दिवस पर नोहर स्थित अबेडकर विहार में भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए शिक्षा, समानता और न्याय की क्रांति का प्रतीक था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि डॉ. अंबेडकर ने गुलामी, भेदभाव और सामाजिक अत्याचार की बेड़ियों को तोड़ते हुए स्वयं को शिक्षित किया और समाज के प्रत्येक वर्ग को अधिकार, समानता और न्याय की राह दिखाई। उन्होंने अपने जीवन में यही संदेश दिया कि “शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो।’’

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नवयुवक संघ के अध्यक्ष राधेश्याम जोईया, सचिव दीपक रेगर, कोषाध्यक्ष भगवाना राम बसेर, पार्षद संतलाल रैगर, शेर सिंह, सुभाष बरोड़, किशन गोधा, हरदेव सिंह फुलवाड़िया, हरिराम मीणा, ओम राठी, शिव उज्जैन, विजेंद्र वर्मा, लीलाधर मुनपरिया, ज्ञानाराम बाकोलिया, रतनलाल शक्रवाल, दलीप बिवान, बाबूलाल मुनपरिया, सुभाष कड़ेला सहित अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना ही नहीं था, बल्कि समाज में शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की भावना को बढ़ावा देना भी था। उपस्थित जनों ने मिलकर डॉ. अंबेडकर के आदर्शों और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया, जिससे यह संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।

इस तरह नोहर में आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा सामाजिक समरसता और न्याय की भावना को जीवंत रखने का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनी।

Pratahkal Bureau

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