शीर्षक: ग्राम पंचायत 22 एनटीआर में मनरेगा और पीएम आवास योजना में कथित घोटाला, जांच की मांग लेकर मामला जिला कलेक्टर तक पहुंचा
नोहर की ग्राम पंचायत 22 एनटीआर में मनरेगा और पीएम आवास योजना में कथित घोटाले को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज। प्रारंभिक जांच में सरपंच व कार्मिकों पर आरोप, जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निलंबन, वसूली और मुकदमे की मांग, 15 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी।

नोहर, 13 दिसम्बर। क्षेत्र की ग्राम पंचायत 22 एनटीआर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए कथित घोटाले को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार तेज होता जा रहा है। इस गंभीर मामले ने अब जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत 22 एनटीआर में मनरेगा और पीएम आवास योजना के तहत व्यापक स्तर पर अनियमितताएं की गईं। प्रारंभिक जांच में सरपंच और कुछ कार्मिकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। ज्ञापन में मांग की गई है कि दोषी पाए गए सरपंच और कार्मिकों को तत्काल निलंबित किया जाए, अपात्र लाभार्थियों को दी गई सरकारी राशि की वसूली की जाए तथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
गांव के देवीलाल पुत्र मंगलाराम ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि जिला परिषद द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच के बाद जिला परिषद ने संबंधित विकास अधिकारी को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा, लेकिन इसके बावजूद नोहर पंचायत समिति के अधिकारियों पर मामले को दबाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने केवल औपचारिक नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली, जबकि ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 15 दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। इस मामले में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओपी बिश्रोई ने नोहर पंचायत समिति के विकास अधिकारी को निर्देश दिए थे कि अपात्र परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ देने के मामले में नियमानुसार वसूली की जाए और सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव भेजे जाएं।
सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई न केवल ग्रामीणों की उम्मीदों को दिशा देगी, बल्कि जनकल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।

Pratahkal Bureau
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